ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

देवउठनी — प्रश्नोत्तरी

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 4 प्रश्न

🔍
त्योहार पूजा

तुलसी विवाह के बाद शादी विवाह शुरू होने का क्या कारण है?

तुलसी विवाह बाद शादी: विष्णु जागरण (दैवी आशीर्वाद उपलब्ध), चातुर्मास समाप्ति (4 माह वर्जन हटा), प्रथम दैवी विवाह (तुलसी+शालिग्राम), ऋतु अनुकूल (यात्रा सुगम), शुभ मुहूर्त प्रचुर (मार्गशीर्ष-माघ)।

तुलसी विवाहदेवउठनीविवाह मुहूर्त
व्रत विधि

देवशयनी एकादशी से देवउठनी तक शुभ कार्य क्यों नहीं करते?

चातुर्मास: विष्णु निद्रा (दैवी कृपा अनुपलब्ध), वर्षा ऋतु (यात्रा कठिन), तप-साधना काल, जीव रक्षा (अहिंसा)। वर्जित: विवाह, मुण्डन, गृह प्रवेश। अनुमत: पूजा, व्रत, दान। देवउठनी = मुक्ति → विवाह आरम्भ।

चातुर्मासदेवशयनीदेवउठनी
व्रत विधि

प्रबोधिनी एकादशी पर विष्णु जागरण कैसे करें?

प्रबोधिनी एकादशी: कार्तिक शुक्ल एकादशी। विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं। विधि: शंख-घण्टा से जगाएँ → 'उत्तिष्ठ गोविन्द...' मंत्र → षोडशोपचार → तुलसी विवाह → रात्रि जागरण → गन्ना-आँवला भोग। चातुर्मास समाप्ति, विवाह मुहूर्त आरम्भ।

प्रबोधिनी एकादशीदेवउठनीकार्तिक शुक्ल एकादशी
व्रत एवं पर्व

देवशयनी और देवउठनी एकादशी में क्या अंतर है

देवशयनी (आषाढ़ शुक्ल एकादशी) = विष्णु का शयन, चातुर्मास आरम्भ, शुभ कार्य बन्द। देवउठनी (कार्तिक शुक्ल एकादशी) = विष्णु का जागरण, चातुर्मास समाप्त, शुभ कार्य + विवाह आरम्भ, तुलसी विवाह। ~4 मास अन्तराल। पद्मपुराण: देवउठनी = 1000 अश्वमेध फल।

देवशयनीदेवउठनीएकादशी

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।