विस्तृत उत्तर
देवशयनी (आषाढ़ शुक्ल एकादशी) से देवउठनी (कार्तिक शुक्ल एकादशी) = चातुर्मास (4 माह) = शुभ कार्य वर्जित:
- 1विष्णु निद्रा: भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं। देवता सोये हुए = शुभ कार्यों में दैवी आशीर्वाद अनुपलब्ध।
- 1वर्षा ऋतु: चातुर्मास = वर्षा काल। यात्रा कठिन, बाढ़/रोग का खतरा। विवाह = बारात/यात्रा = वर्षा में अव्यावहारिक। गृह प्रवेश = नमी/सीलन।
- 1तप-साधना काल: चातुर्मास = तप, व्रत, अध्ययन, साधना हेतु। संन्यासी = एक स्थान पर रुकते हैं। गृहस्थ = सात्त्विक जीवन, आध्यात्मिक उन्नति।
- 1कीट-जीव रक्षा: वर्षा = कीट-पतंगे, जीव-जन्तु प्रचुर। यात्रा/निर्माण = जीव हिंसा। अहिंसा = चातुर्मास धर्म।
वर्जित कार्य: विवाह, मुण्डन, गृह प्रवेश, नया व्यापार आरम्भ, यात्रा (तीर्थ छोड़कर), मांसाहार (कुछ क्षेत्रों में)।
अनुमत: पूजा-पाठ (विशेष पुण्यदायी), व्रत, दान, अध्ययन, सत्संग।
देवउठनी = मुक्ति: कार्तिक शुक्ल एकादशी = विष्णु जागरण → तुलसी विवाह → विवाह मुहूर्त पुनः आरम्भ।





