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व्रत विधि📜 पद्म पुराण, विष्णु पुराण, भागवत पुराण1 मिनट पठन

देवशयनी एकादशी से देवउठनी तक शुभ कार्य क्यों नहीं करते?

संक्षिप्त उत्तर

चातुर्मास: विष्णु निद्रा (दैवी कृपा अनुपलब्ध), वर्षा ऋतु (यात्रा कठिन), तप-साधना काल, जीव रक्षा (अहिंसा)। वर्जित: विवाह, मुण्डन, गृह प्रवेश। अनुमत: पूजा, व्रत, दान। देवउठनी = मुक्ति → विवाह आरम्भ।

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विस्तृत उत्तर

देवशयनी (आषाढ़ शुक्ल एकादशी) से देवउठनी (कार्तिक शुक्ल एकादशी) = चातुर्मास (4 माह) = शुभ कार्य वर्जित:

  1. 1विष्णु निद्रा: भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं। देवता सोये हुए = शुभ कार्यों में दैवी आशीर्वाद अनुपलब्ध।
  1. 1वर्षा ऋतु: चातुर्मास = वर्षा काल। यात्रा कठिन, बाढ़/रोग का खतरा। विवाह = बारात/यात्रा = वर्षा में अव्यावहारिक। गृह प्रवेश = नमी/सीलन।
  1. 1तप-साधना काल: चातुर्मास = तप, व्रत, अध्ययन, साधना हेतु। संन्यासी = एक स्थान पर रुकते हैं। गृहस्थ = सात्त्विक जीवन, आध्यात्मिक उन्नति।
  1. 1कीट-जीव रक्षा: वर्षा = कीट-पतंगे, जीव-जन्तु प्रचुर। यात्रा/निर्माण = जीव हिंसा। अहिंसा = चातुर्मास धर्म।

वर्जित कार्य: विवाह, मुण्डन, गृह प्रवेश, नया व्यापार आरम्भ, यात्रा (तीर्थ छोड़कर), मांसाहार (कुछ क्षेत्रों में)।

अनुमत: पूजा-पाठ (विशेष पुण्यदायी), व्रत, दान, अध्ययन, सत्संग।

देवउठनी = मुक्ति: कार्तिक शुक्ल एकादशी = विष्णु जागरण → तुलसी विवाह → विवाह मुहूर्त पुनः आरम्भ।

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शास्त्रीय स्रोत
पद्म पुराण, विष्णु पुराण, भागवत पुराण
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