विस्तृत उत्तर
परमा एकादशी अधिक मास (पुरुषोत्तम मास/मल मास) के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी है। अधिक मास प्रत्येक 2.5-3 वर्ष में एक बार आता है।
विशेष उद्देश्य
- 1अधिक मास = पुरुषोत्तम मास: अधिक मास को अन्य कोई देवता स्वीकार नहीं करते थे, तब भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) ने इसे अपना मास बनाया। इसलिए इस मास की एकादशी अत्यंत विशेष है।
- 1सर्वपाप नाश: परमा एकादशी का व्रत करने से अन्य सभी एकादशियों का सम्मिलित पुण्य प्राप्त होता है।
- 1मोक्ष प्राप्ति: पद्म पुराण में कहा गया है कि परमा एकादशी का फल मोक्ष तक ले जाता है। 'परमा' = परम (सर्वश्रेष्ठ)।
- 1विशेष पुण्यकाल: अधिक मास में किया गया कोई भी पुण्य कर्म (दान, जप, तप) सामान्य से अनेक गुना फल देता है।
व्रत विधि: सामान्य एकादशी व्रत विधि — दशमी शाम भोजन → एकादशी निर्जला/फलाहार → विष्णु पूजा, 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' जप → रात्रि जागरण → द्वादशी पारण।
किस उद्देश्य से रखें
- ▸समस्त पापों से मुक्ति।
- ▸अधिक मास के विशेष पुण्य लाभ।
- ▸मोक्ष कामना।
- ▸जीवन के जटिल संकटों से मुक्ति।
विशेष: अधिक मास में विवाह, गृह प्रवेश आदि वर्जित होते हैं किन्तु दान, व्रत, जप, तप विशेष पुण्यदायी हैं।





