विस्तृत उत्तर
वट सावित्री व्रत = ज्येष्ठ अमावस्या — सुहागिन महिलाओं का व्रत (पति दीर्घायु)।
कथा: सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस लिए — वट(बरगद) वृक्ष के नीचे।
पूजा विधि
- 1प्रातः स्नान → सोलह श्रृंगार।
- 2बरगद पेड़ के पास जाएँ।
- 3जल+दूध+रोली+अक्षत+फूल+फल चढ़ाएँ।
- 4कच्चा सूत(मौली) बरगद पर बांधें — 7 बार परिक्रमा करते हुए।
- 5वट सावित्री कथा सुनें/पढ़ें।
- 6मंत्र: *'वट सावित्र्यै नमः'* या *'ॐ सावित्र्यै नमः'*।
- 7व्रत रखें (निर्जला या फलाहार)।
बरगद = अमरत्व प्रतीक: बरगद की जड़ें ऊपर से नीचे = अमर (गीता 15.1 — ऊर्ध्वमूल अश्वत्थ)। सुहागिन बरगद पूजती = पति दीर्घायु प्रार्थना।
