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व्रत पूजा📜 स्कन्द पुराण, भविष्योत्तर पुराण, निर्णयामृत, महाभारत (वनपर्व — सावित्री उपाख्यान)3 मिनट पठन

बरगद के पेड़ की पूजा वट सावित्री व्रत में कैसे करें

संक्षिप्त उत्तर

वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ अमावस्या (उत्तर भारत) या ज्येष्ठ पूर्णिमा (महाराष्ट्र/दक्षिण) को मनाया जाता है। स्नान-श्रृंगार के बाद बरगद की जड़ में जल, रोली, अक्षत, पुष्प चढ़ाएँ। कच्चा सूत 7 बार तने पर लपेटते हुए 7 परिक्रमा करें। सावित्री-सत्यवान कथा सुनें। वट में त्रिदेवों का वास — स्कन्द/भविष्योत्तर पुराण।

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विस्तृत उत्तर

वट सावित्री व्रत सुहागिन स्त्रियों का अत्यन्त महत्वपूर्ण व्रत है, जो पति की दीर्घायु और अखण्ड सौभाग्य के लिए किया जाता है। इसमें वट (बरगद) वृक्ष की पूजा केन्द्रीय अनुष्ठान है।

तिथि

तिथि में दो मत हैं:

  • स्कन्द पुराण और भविष्योत्तर पुराण: ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा (महाराष्ट्र, गुजरात, दक्षिण भारत में प्रचलित)।
  • निर्णयामृत: ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या (उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश, पंजाब, हरियाणा में प्रचलित)।

वट वृक्ष का महत्व

पुराणों में वट वृक्ष में त्रिदेवों का वास माना गया है — जड़ में ब्रह्मा, तने में विष्णु, शाखाओं में शिव। यह दीर्घायु और अमरत्व का प्रतीक है। सावित्री-सत्यवान की कथा में सत्यवान बरगद के पेड़ के नीचे ही मृत्यु को प्राप्त हुए थे, और सावित्री ने अपने पातिव्रत्य बल से यमराज से पति के प्राण वापस लिए।

पूजा विधि

1तैयारी

  • प्रातःकाल स्नान करके सोलह श्रृंगार करें।
  • लाल या पीला वस्त्र पहनें।
  • पूजा सामग्री: जल, रोली, अक्षत, हल्दी, कुमकुम, लाल-पीले फूल, धूप, दीपक, मिठाई, फल, कच्चा सूत (सफ़ेद धागा), बाँस का पंखा, पान-सुपारी, सिंदूर।

2संकल्प

व्रत का संकल्प लें — 'मैं वट सावित्री व्रत अपने पति की दीर्घायु और सौभाग्य के लिए कर रही हूँ।'

3वट वृक्ष पूजन

  • वट वृक्ष के नीचे सावित्री-सत्यवान की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  • सबसे पहले गणेश पूजन, फिर माता गौरी पूजन करें।
  • वट वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करें।
  • रोली, अक्षत, हल्दी, कुमकुम, पुष्प चढ़ाएँ।
  • धूप-दीप जलाएँ।
  • नैवेद्य (मिठाई, फल) अर्पित करें।

4कच्चा सूत लपेटना

  • कच्चा सूत (रक्षा सूत्र) लेकर बरगद के तने के चारों ओर 7 बार लपेटें, साथ में 7 परिक्रमा करें।
  • कुछ परम्पराओं में 11 परिक्रमा का भी विधान है।
  • सूत लपेटना अटूट दाम्पत्य और पति की दीर्घायु का प्रतीक है।

5कथा श्रवण

  • वट सावित्री व्रत कथा (सावित्री-सत्यवान की कथा) का पाठ या श्रवण करें।

6व्रत पारण

  • निर्जला या फलाहार व्रत रखें।
  • अगले दिन सूर्योदय के बाद व्रत का पारण करें।

घर पर पूजा

यदि वट वृक्ष उपलब्ध न हो, तो बरगद की डाली या छोटा पौधा लाकर, या सावित्री-सत्यवान का चित्र रखकर घर पर भी विधिपूर्वक पूजा की जा सकती है।

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शास्त्रीय स्रोत
स्कन्द पुराण, भविष्योत्तर पुराण, निर्णयामृत, महाभारत (वनपर्व — सावित्री उपाख्यान)
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