विस्तृत उत्तर
नवरात्रि व्रत की विधि देवी भागवत पुराण में विस्तार से वर्णित है:
व्रत के प्रकार
- 1निर्जला व्रत — जल भी नहीं (अत्यंत कठोर, केवल विशेष परिस्थिति में)
- 2फलाहारी व्रत — फल और दूध (सर्वाधिक प्रचलित)
- 3एकाहारी व्रत — दिन में एक बार भोजन (सायंकाल)
व्रत के नियम
भोजन नियम
- ▸लहसुन, प्याज, मांस, मछली, अंडा — वर्जित
- ▸तामसिक भोजन वर्जित
- ▸फलाहार में: फल, दूध, दही, मखाना, साबुदाना, सिंघाड़ा आटा, कुट्टू का आटा, आलू
- ▸नमक: सेंधा नमक ग्रहण करें, सामान्य नमक वर्जित
- ▸मिठाई में: मखाने की खीर, साबुदाने की खिचड़ी
आचरण नियम
- 1ब्रह्मचर्य का पालन करें
- 2झूठ, क्रोध, हिंसा और परनिंदा से बचें
- 3प्रतिदिन शिव-दुर्गा पूजा करें
- 4दिन में न सोएं
- 5सादा और नम्र व्यवहार करें
व्रत की दिनचर्या
प्रातःकाल
- 1ब्रह्ममुहूर्त में उठें
- 2स्नान करें
- 3कलश पूजन और दुर्गा पूजा
- 4सप्तशती पाठ या मंत्र जप
मध्यान्ह
- ▸फलाहार ग्रहण करें
सायंकाल
- ▸पुनः दुर्गा आरती
- ▸यदि एकाहारी व्रत है तो यहाँ भोजन ग्रहण करें
रात्रि
- ▸देवी भजन, जागरण (यदि संभव हो)
व्रत पारण (दशमी को)
- ▸स्नान के बाद ब्राह्मण भोज
- ▸कन्या भोज (नवमी को) करें
- ▸व्रत का उद्यापन
सामान्य जन के लिए: यदि पूर्ण व्रत संभव न हो तो प्रतिदिन सात्विक भोजन और प्रतिदिन दुर्गा पूजा से भी पुण्य मिलता है।





