विस्तृत उत्तर
एकादशी व्रत में चावल वर्जित होने का पौराणिक और आयुर्वेदिक आधार:
पौराणिक कारण (पद्म पुराण)
पद्म पुराण की कथा: एक बार 'पाप पुरुष' (पाप का साकार रूप) ने भागकर अन्न (विशेषतः चावल) में शरण ली। एकादशी तिथि को चावल खाना = पाप पुरुष को शरीर में आमंत्रित करना। इसलिए एकादशी = चावल (और सभी अन्न) वर्जित।
'चावल विशेष वर्जित क्यों' (अन्य अनाज से अधिक)
- 1चावल में जल तत्व प्रबल = तमोगुण वर्धक। एकादशी = सत्त्व वर्धक दिन — तमोगुण वर्जित।
- 2चावल = चन्द्रमा से सम्बद्ध। एकादशी = विष्णु तिथि। चन्द्र अन्न = विष्णु व्रत में अनुचित (कुछ शास्त्रकारों का मत)।
- 3आयुर्वेद: चावल = शीतल, कफकारक। एकादशी उपवास = शरीर शुद्धि — चावल शुद्धि में बाधक।
क्या-क्या वर्जित: सभी अन्न — चावल, गेहूँ, जौ, दालें, मक्का, बाजरा। चावल विशेष रूप से उल्लिखित।
विकल्प: कुट्टू, साबूदाना, सिंघाड़ा, राजगिरा, समा चावल (barnyard millet — यह 'चावल' नहीं, बाजरा परिवार)। फल, दूध, मेवे।
विशेष: दशमी (पूर्व दिन) शाम को भी चावल न खाएँ — अगले दिन एकादशी हो तो।





