ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
व्रत विधि📜 पद्म पुराण, विष्णु पुराण, धर्मसिंधु2 मिनट पठन

एकादशी व्रत में चावल क्यों नहीं खाते?

संक्षिप्त उत्तर

चावल वर्जित: पद्म पुराण — पाप पुरुष अन्न/चावल में छिपा। चावल=जल तत्व/तमोगुण (एकादशी=सत्त्व), चन्द्र सम्बद्ध, कफकारक (शुद्धि बाधक)। सभी अन्न वर्जित। विकल्प: कुट्टू, साबूदाना, फल, दूध, समा चावल।

📖

विस्तृत उत्तर

एकादशी व्रत में चावल वर्जित होने का पौराणिक और आयुर्वेदिक आधार:

पौराणिक कारण (पद्म पुराण)

पद्म पुराण की कथा: एक बार 'पाप पुरुष' (पाप का साकार रूप) ने भागकर अन्न (विशेषतः चावल) में शरण ली। एकादशी तिथि को चावल खाना = पाप पुरुष को शरीर में आमंत्रित करना। इसलिए एकादशी = चावल (और सभी अन्न) वर्जित।

'चावल विशेष वर्जित क्यों' (अन्य अनाज से अधिक)

  1. 1चावल में जल तत्व प्रबल = तमोगुण वर्धक। एकादशी = सत्त्व वर्धक दिन — तमोगुण वर्जित।
  2. 2चावल = चन्द्रमा से सम्बद्ध। एकादशी = विष्णु तिथि। चन्द्र अन्न = विष्णु व्रत में अनुचित (कुछ शास्त्रकारों का मत)।
  3. 3आयुर्वेद: चावल = शीतल, कफकारक। एकादशी उपवास = शरीर शुद्धि — चावल शुद्धि में बाधक।

क्या-क्या वर्जित: सभी अन्न — चावल, गेहूँ, जौ, दालें, मक्का, बाजरा। चावल विशेष रूप से उल्लिखित।

विकल्प: कुट्टू, साबूदाना, सिंघाड़ा, राजगिरा, समा चावल (barnyard millet — यह 'चावल' नहीं, बाजरा परिवार)। फल, दूध, मेवे।

विशेष: दशमी (पूर्व दिन) शाम को भी चावल न खाएँ — अगले दिन एकादशी हो तो।

📜
शास्त्रीय स्रोत
पद्म पुराण, विष्णु पुराण, धर्मसिंधु
क्या यह उत्तर उपयोगी था? इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें

🏷 सम्बंधित विषय

एकादशीचावलवर्जितपापपद्म पुराण

इसी विषय के अन्य प्रश्न

📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

एकादशी व्रत में चावल क्यों नहीं खाते — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको व्रत विधि से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। यह उत्तर पद्म पुराण, विष्णु पुराण, धर्मसिंधु पर आधारित है। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।