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व्रत विधि📜 शिव पुराण, व्रतराज, लोक परम्परा1 मिनट पठन

हरतालिका तीज पर निर्जला व्रत रखने का क्या विशेष फल है?

संक्षिप्त उत्तर

हरतालिका निर्जला: पार्वती तप अनुसरण, अखण्ड सौभाग्य (करवा चौथ से कठिन=फल अधिक), शिव-पार्वती कृपा (दाम्पत्य+संतान), पापक्षय, अगले जन्म सौभाग्य। स्वास्थ्य सर्वोपरि — जल छूट।

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विस्तृत उत्तर

हरतालिका तीज निर्जला व्रत फल:

  1. 1पार्वती तुल्य तप: पार्वती ने निर्जला तप से शिव प्राप्त किए। हरतालिका निर्जला = पार्वती अनुसरण = उनकी कृपा।
  1. 1अखण्ड सौभाग्य: सुहागन स्त्री = पति दीर्घायु, सौभाग्य अखण्ड। यह व्रत = करवा चौथ से भी कठिन = फल भी अधिक।
  1. 1शिव-पार्वती कृपा: शिव+पार्वती दोनों प्रसन्न = दाम्पत्य सुख, संतान सुख, गृहस्थ समृद्धि।
  1. 1पाप क्षय: निर्जला = सबसे कठोर तप। कठोर तप = अधिक पापक्षय = अधिक पुण्य।
  1. 1अगले जन्म: शिव पुराण: हरतालिका निर्जला = अगले जन्म में भी उत्तम पति + सौभाग्य।

सावधानी: अत्यंत कठोर — जल भी नहीं (भाद्रपद = गर्मी-उमस)। स्वास्थ्य सर्वोपरि। वृद्ध/रोगी/गर्भवती = जल की छूट। शिव-पार्वती भावना देखते हैं, कष्ट नहीं।

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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण, व्रतराज, लोक परम्परा
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