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व्रत विधि📜 शिव पुराण, स्कन्द पुराण, आयुर्वेद1 मिनट पठन

श्रावण मास में मांसाहार का त्याग क्यों करते हैं?

संक्षिप्त उत्तर

श्रावण मांस त्याग: शिव मास (सात्त्विक), वर्षा=प्रजनन काल (जैवविविधता), आयुर्वेद (अग्नि मंद, गरिष्ठ=रोग), कीटाणु वृद्धि, साधना काल=शुद्ध आहार। चातुर्मास=4 माह त्याग।

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विस्तृत उत्तर

श्रावण में मांसाहार त्याग:

  1. 1शिव मास: श्रावण = शिव प्रिय। शिव = वैराग्य। मांस = तामसिक = शिव पूजा में अनुचित।
  2. 2वर्षा ऋतु = प्रजनन काल: पशु-पक्षियों का प्रजनन काल → हिंसा = पाप + जैवविविधता हानि। प्राचीन ऋषियों = पारिस्थितिक संतुलन।
  3. 3आयुर्वेद: वर्षा = पाचक अग्नि मंद। मांस = गरिष्ठ (भारी) → पचना कठिन → रोग। सात्त्विक = सुपाच्य।
  4. 4जीवों में कीटाणु: वर्षा = कीटाणु-परजीवी बढ़ते हैं। मांस = संक्रमण खतरा अधिक।
  5. 5सात्त्विक जीवन: श्रावण = तप-व्रत-साधना काल। सात्त्विक आहार = मन शुद्ध = साधना प्रभावी।

विशेष: केवल श्रावण नहीं — कई परम्पराओं में चातुर्मास (4 माह) मांसाहार त्याग।

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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण, स्कन्द पुराण, आयुर्वेद
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