श्रावण मांस त्याग: शिव मास (सात्त्विक), वर्षा=प्रजनन काल (जैवविविधता), आयुर्वेद (अग्नि मंद, गरिष्ठ=रोग), कीटाणु वृद्धि, साधना काल=शुद्ध आहार। चातुर्मास=4 माह त्याग।
- 1शिव मास: श्रावण = शिव प्रिय। शिव = वैराग्य। मांस = तामसिक = शिव पूजा में अनुचित।
- 2वर्षा ऋतु = प्रजनन काल: पशु-पक्षियों का प्रजनन काल → हिंसा = पाप + जैवविविधता हानि। प्राचीन ऋषियों = पारिस्थितिक संतुलन।
- 3आयुर्वेद: वर्षा = पाचक अग्नि मंद। मांस = गरिष्ठ (भारी) → पचना कठिन → रोग। सात्त्विक = सुपाच्य।
- 4जीवों में कीटाणु: वर्षा = कीटाणु-परजीवी बढ़ते हैं। मांस = संक्रमण खतरा अधिक।
- 5सात्त्विक जीवन: श्रावण = तप-व्रत-साधना काल। सात्त्विक आहार = मन शुद्ध = साधना प्रभावी।