दिव्यास्त्रमहर्षि दधीचि ने बलिदान से पहले क्या कहा था?दधीचि ने कहा — 'यह शरीर तो एक न एक दिन नष्ट हो ही जाएगा। यदि यह किसी उपयोगी उद्देश्य की पूर्ति कर सके, तो ऐसा ही हो।' यह कहकर उन्होंने योग शक्ति से प्राण त्याग दिए।#दधीचि#बलिदान#वचन
नीलकंठ स्वरूप और कालकूट विषपाननीलकंठ स्वरूप का तात्विक अर्थ क्या है?नीलकंठ स्वरूप का तात्विक अर्थ है — दूसरों के कष्टों को स्वयं धारण करना ही सच्चा शिवत्व है। शिव की महानता शक्ति में नहीं बल्कि आत्म-त्याग और परोपकार में निहित है।#नीलकंठ तत्व#शिवत्व#त्याग
जीवन एवं मृत्युप्रेत को कौन त्याग देता है?प्रेत को त्याग देते हैं — स्वयं का स्थूल शरीर, परिवार-मित्र-धन-पद सब यहीं छूट जाते हैं। 'केवल कर्म साथ जाते हैं।' यममार्ग पर जीव पूर्णतः एकाकी है — यही गरुड़ पुराण का संदेश है।#प्रेत#त्याग#असहाय
हिंदू दर्शनवैराग्य और संन्यास में क्या फर्क है?वैराग्य एक मानसिक अवस्था है — विषयों में आसक्ति का अभाव — जो गृहस्थ रहते हुए भी हो सकता है। संन्यास एक विधिवत जीवनपद्धति है जिसमें परिवार, संपत्ति और सांसारिक दायित्वों का बाह्य त्याग होता है। वैराग्य संन्यास की पूर्वशर्त है — बिना वैराग्य के संन्यास केवल दिखावा है।#वैराग्य#संन्यास#त्याग
गृहस्थ धर्मगृहस्थ त्याग वैराग्य कैसे अपनाएंघर नहीं, मोह छोड़ना। गीता: कमल पत्ते जैसे। कर्तव्य+attachment कम। दान/ध्यान/सत्संग। जनक/राम=गृहस्थ वैरागी। गृहस्थ वैराग्य=सन्यास से कठिन।#गृहस्थ#त्याग#वैराग्य
व्रत विधिश्रावण मास में मांसाहार का त्याग क्यों करते हैं?श्रावण मांस त्याग: शिव मास (सात्त्विक), वर्षा=प्रजनन काल (जैवविविधता), आयुर्वेद (अग्नि मंद, गरिष्ठ=रोग), कीटाणु वृद्धि, साधना काल=शुद्ध आहार। चातुर्मास=4 माह त्याग।#श्रावण#मांसाहार#त्याग
आध्यात्मिक साधनाआध्यात्मिक साधना में वैराग्य का क्या अर्थ है?वैराग्य: योगसूत्र 1.15 — विषयों से तृष्णा अभाव (घृणा नहीं)। अनासक्ति+विवेक-जन्य+स्वतःस्फूर्त। वैराग्य≠संसार-त्याग/घृणा/दमन/अवसाद। गीता 2.59: 'परम दर्शन से रस भी छूटे=सच्चा।' चरण: यतमान→व्यतिरेक→एकेन्द्रिय→वशीकार→परवैराग्य। अभ्यास+वैराग्य=मन नियंत्रण।#वैराग्य#विरक्ति#त्याग
वेद ज्ञानवेदों में यज्ञ का महत्व क्या है?वेदों में यज्ञ देव-मनुष्य परस्पर-सम्बन्ध का सेतु है। ऋग्वेद (1/1/1) का प्रथम श्लोक अग्नि-यज्ञ से आरंभ होता है। गीता (3/14-16) में वर्षा-अन्न-जीवन-यज्ञ का ब्रह्मांडीय चक्र बताया गया है। पाँच महायज्ञ प्रत्येक गृहस्थ का नित्य-कर्तव्य है।#यज्ञ#वेद#हवन
आध्यात्मिक साधनाआध्यात्मिक साधना में वैराग्य का क्या अर्थ है?वैराग्य: योगसूत्र 1.15 — विषयों से तृष्णा अभाव (घृणा नहीं)। अनासक्ति+विवेक-जन्य+स्वतःस्फूर्त। वैराग्य≠संसार-त्याग/घृणा/दमन/अवसाद। गीता 2.59: 'परम दर्शन से रस भी छूटे=सच्चा।' चरण: यतमान→व्यतिरेक→एकेन्द्रिय→वशीकार→परवैराग्य। अभ्यास+वैराग्य=मन नियंत्रण।#वैराग्य#विरक्ति#त्याग
महाभारतगांधारी ने आँखों पर पट्टी क्यों बाँधी?गांधारी ने विवाह के बाद जब जाना कि उनके पति धृतराष्ट्र नेत्रहीन हैं, तब पतिव्रत-धर्म की भावना से अपनी आँखों पर पट्टी बाँध ली — 'जब पति संसार नहीं देख सकते तो मुझे क्या अधिकार।' यह भारतीय साहित्य में आत्मत्याग का अनुपम उदाहरण है।#गांधारी#आँखों की पट्टी#पतिव्रत