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प्रेत को कौन त्याग देता है?

प्रेत को त्याग देते हैं — स्वयं का स्थूल शरीर, परिवार-मित्र-धन-पद सब यहीं छूट जाते हैं। 'केवल कर्म साथ जाते हैं।

संक्षिप्त उत्तर

प्रेत को त्याग देते हैं — स्वयं का स्थूल शरीर, परिवार-मित्र-धन-पद सब यहीं छूट जाते हैं। 'केवल कर्म साथ जाते हैं।' यममार्ग पर जीव पूर्णतः एकाकी है — यही गरुड़ पुराण का संदेश है।

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विस्तृत उत्तर

गरुड़ पुराण में प्रेत की असहायता का वर्णन उस क्षण से शुरू होता है जब यमदूत आते हैं।

शरीर का त्याग — स्वयं का शरीर सबसे पहले त्याग देता है। गरुड़ पुराण में वर्णित है — 'प्राणियों के साथ द्रोह करके भरण-पोषण किये गये अपने स्थूल शरीर को यहीं छोड़कर पापी अकेला ही अंधकारपूर्ण नरक में जाता है।'

सांसारिक संबंधों का त्याग — यमराज के यहाँ कोई रिश्ता काम नहीं आता। गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'केवल कर्म ही साथ जाते हैं।' परिवार, धन, पद — सब यहीं छूट जाते हैं।

मित्र और बंधु — गरुड़ पुराण में 'बंधु-बांधवों का रुदन' तो होता है परंतु वे भी बाद में अपने जीवन में लग जाते हैं। कोई साथ नहीं जाता।

निरंकुश अकेलापन — यममार्ग पर जीव को 'अकेला' (एकाकी) ही जाना होता है। गरुड़ पुराण में — 'यममार्ग में जीव अकेला क्यों होता है?' का उत्तर यही है — 'पाप और पुण्य साथ जाते हैं, बाकी सब छूट जाते हैं।'

गरुड़ पुराण का संदेश — यही कारण है कि जीवन में दान, भक्ति और सत्कर्म करने चाहिए — ये ही यममार्ग पर सच्चे साथी हैं।

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