विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में दान न करने के दंड का अत्यंत विस्तृत वर्णन है।
यमदूत का उलाहना — 'अरे दुराचारियों! सुलभ होने वाले भी जल और अन्न का दान कभी क्यों नहीं दिया?' यह उलाहना दान न करने वाले को यमलोक में मिलता है।
कुड्म और कालसूत्र — गरुड़ पुराण में — 'केवल अपना या अपने कुटुम्बीजनों का ही पेट भरने वाले को कुड्मल, कालसूत्र, पूतिमृत्तिक जैसे नरक भोगने पड़ सकते हैं।'
वैतरणी — 'वैतरणी नरक में दान न करने वालों को गंदगी भरी नदी पार करवाई जाती है।'
यममार्ग पर कष्ट — 'दानरूपी पाथेय रहित प्राणी को यममार्ग में क्लेश प्राप्त होता है।'
पुनर्जन्म में — गरुड़ पुराण के पाँचवें अध्याय में — 'दान न देने से प्राणी दरिद्र होता है। दरिद्र हो जाने पर फिर पाप करता है। पाप के प्रभाव से नरक में जाता है और नरक से लौटकर पुन: दरिद्र होता है।' यह एक दुष्चक्र है।





