विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में दान में कपट और अनुचित पात्र को दान देना दोनों के दंड का वर्णन है।
तमिश्रम नरक — दान में कपट करना एक प्रकार का धोखा है। 'धोखे से किसी की संपत्ति हड़पने वाले को तमिश्रम नरक में बार-बार पिटाई मिलती है।'
ब्राह्मण का अतिक्रमण — गरुड़ पुराण के पाँचवें अध्याय में — 'अपने आश्रित वेदपरायण ब्राह्मण को छोड़कर अन्य को दान देना ब्राह्मण का अतिक्रमण है। ब्राह्मण का अतिक्रमण करने वाला व्यक्ति नरकों को भोगकर क्रमशः जन्मान्ध एवं दरिद्र होता है।'
प्रतिज्ञा तोड़ना — 'प्रतिज्ञा करके द्विज को दान न देने वाला सियार होता है।' दान का वचन देकर न देना भी कपट ही है।
अशुद्ध पात्र से श्राद्ध — 'जादू-टोना करने वाले पंडितों से यज्ञ, पूजा और श्राद्ध करवाने से पितरों को नरक की प्राप्ति होती है।' दान-कर्म में अशुद्धि का यह परिणाम है।
इस जन्म में — दान में कपट का फल दानी को इसी जन्म में मिलता है — दान का पुण्य नहीं मिलता।





