विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में महारौरव नरक की यातना का वर्णन रौरव से भी अधिक भीषण बताया गया है।
रौरव से अधिक भयंकर — गरुड़ पुराण में 21 प्रमुख नरकों की सूची में महारौरव तीसरे स्थान पर है। 'तामिस्त्र, लोहशंकु, महारौरव...' — यह क्रम इसकी गंभीरता दर्शाता है।
रुरु और अग्नि — रौरव में रुरु जीव नोचते हैं। महारौरव में यह यातना और तीव्र है — बड़े और अधिक शक्तिशाली रुरु जीव, अधिक तीव्र अग्नि।
कल्पान्त तक — 'इन नरकों में गिरे हुए मूर्ख, पापी, अधर्मी जीव कल्पपर्यन्त उन-उन नरक-यातनाओं को भोगते हैं।' महारौरव में यह अवधि और लंबी हो सकती है।
निर्दोष-पीड़कों के लिए — महारौरव उन लोगों के लिए है जिन्होंने बड़े पैमाने पर निर्दोष प्राणियों को कष्ट दिया। इसीलिए यातना भी बड़े पैमाने पर और बहुत तीव्र होती है।
यातना का स्वरूप — 'इस प्रकार हजारों नर-नारी नारकीय यातना को भोगते हुए प्रलयपर्यन्त घोर नरकों में पकते रहते हैं।'





