विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में कालसूत्र नरक की यातना-विधि का वर्णन है।
आग पर चलाना — 'कालसूत्र नरक में समय बर्बाद करने वालों को आग पर चलाया जाता है।' धधकती अग्नि पर नंगे पाँव चलने की पीड़ा असहनीय है।
गरुड़ पुराण के 21 नरकों में — कालसूत्रक इन 21 प्रमुख नरकों में सम्मिलित है। 'तामिस्त्र, लोहशंकु, महारौरव, शाल्मली, रौरव, कुड्म, कालसूत्रक...' — यह इस नरक का शास्त्रीय नाम है।
तप्तभूमि — कालसूत्र नरक में भूमि ही तप्त-लोह के समान है। आत्मा को इस तप्त भूमि पर चलना पड़ता है। ऊपर से अग्नि और नीचे से धधकती भूमि — दोनों ओर से जलाया जाता है।
प्रतीकार्थ — जिसने अपना समय (काल) बर्बाद किया और धर्म-कर्म नहीं किया, उसे कालसूत्र में 'काल' की ही अग्नि से जलाया जाता है।
यातना की अवधि — 'इन नरकों में गिरे हुए पापी जीव कल्पपर्यन्त यातनाओं को भोगते हैं।'





