विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में पितरों का अपमान — तर्पण न करना, श्राद्ध न करना, उनकी स्मृति का अनादर — सभी गंभीर पाप हैं।
यमदूत का उलाहना — गरुड़ पुराण के तृतीय अध्याय में — 'पितरों का तर्पण नहीं किया।' यह उलाहना यमदूत देते हैं और इसी के लिए दंड दिया जाता है।
कुड्म और पूतिमृत्तिक — 'पितरों तथा देवताओं की पूजा छोड़ देने वाले — ऐसे लोगों को कुड्मल जैसे नरक भोगने पड़ते हैं।'
उग्रगंध नरक — 'जो लोग पितरों को पिंडदान नहीं करते, वे उग्रगंध नरक में लाए जाते हैं।' पिंडदान न करना पितर-अपमान का ही रूप है।
पितृदोष — 'जब तक पितरों की आत्मा संतुष्ट नहीं होती, वंशजों को अनेक कष्ट होते हैं।' पितर-अपमान का फल इसी जन्म में पितृदोष के रूप में मिलता है।
गरुड़ पुराण में — 'संतान द्वारा पितरों के निमित्त किए जाने वाले कर्म बहुत महत्वपूर्ण हैं।'





