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जीवन एवं मृत्यु प्रश्नोत्तर — 427 प्रश्न

जीवन एवं मृत्यु से जुड़े 427 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 427 प्रश्न

पितरों का अपमान करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

पितर अपमान पर — कुड्म-पूतिमृत्तिक नरक, उग्रगंध नरक। यमदूत का उलाहना — 'पितरों का तर्पण क्यों नहीं किया?' इस जन्म में पितृदोष। 'पितृ-कर्म बहुत महत्वपूर्ण।'

पितर अपमाननरकपितृदोष
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प्रेत को कष्ट देने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

प्रेत को कष्ट देने पर — पितृदोष (इस जन्म में), नरक (मृत्यु के बाद)। 'पितरों का तर्पण न करना = पाप।' स्वयं भी प्रेत बनकर भटकना। संतान-रोग-व्यापार में हानि।

प्रेत को कष्टनरकपितृदोष
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पिंडदान न करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

पिंडदान न करने वाले को — उग्रगंध नरक (गंदगी से भरा)। पितर को — कल्पान्त तक निर्जन वन में भटकन। 'पितरों का तर्पण न करना = यमदूत का उलाहना।' इस जन्म में पितृदोष।

पिंडदान न करनाउग्रगंधनरक
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श्राद्ध न करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

श्राद्ध न करने वाले को — कुड्म-पूतिमृत्तिक नरक, पितृघातक का दंड। 'श्राद्ध न होने पर पितर प्रेत बना रहता है।' इस जन्म में पितृदोष — रोग, संतानहीनता, कलह।

श्राद्ध न करनानरकपितर
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पवित्र कर्मों को त्यागने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

पवित्र कर्म त्यागने पर — शाल्मी-वृक्ष (व्रत-तीर्थ त्याग), कुड्म, प्रेत योनि (ईश्वर-विमुखता), घोर नरक (देव-पूजा न करना)। यमदूत का उलाहना — 'तीर्थ-पूजा क्यों नहीं की?'

पवित्र कर्म त्यागनरकव्रत-तीर्थ
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अधार्मिक जीवन जीने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

अधार्मिक जीवन पर — कुड्म-कालसूत्र-पूतिमृत्तिक नरक, प्रेत योनि। 'तीर्थ-देव-अतिथि-पितर — सबकी उपेक्षा = नरक।' व्यसनों में लिप्त → नरक। पुनर्जन्म में अधम योनि।

अधार्मिक जीवननरककुड्म
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पाप पर पछतावा न करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

पश्चाताप न करने पर — एक नरक से दूसरे नरक, कोई राहत नहीं, मृत्युकाल का अवसर भी गँवाना। 'हजारों-लाखों वर्षों तक यातना।' घोर नरक — रौरव-महारौरव-कुंभीपाक।

पछतावा न करनादीर्घ नरककर्मफल
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पाप छुपाने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

पाप छुपाने पर — कोई बचाव नहीं। श्रवण देवता सब चित्रगुप्त को बताते हैं। 'गुप्त पाप करने वाले वैतरणी में जाते हैं।' चित्रगुप्त का लेखा — सब कुछ दर्ज।

पाप छुपानानरकश्रवण देवता
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निर्दोष को कष्ट देने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

निर्दोष को कष्ट देने पर — लोहशंकु नरक (कीलें), महारौरव, जलते डंडों से पिटाई। 'निर्दोष को कष्ट = आत्मा का पतन।' अहिंसा परम धर्म।

निर्दोष कष्टलोहशंकुमहारौरव
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दूसरों को कष्ट देने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

दूसरों को कष्ट देने पर — प्रेत योनि, घोर नरक। 'निर्बल को सताने वाला प्रेत योनि में।' जरूरतमंद की मदद न करना — नरक। वैतरणी में ऋण-दंड। इस जन्म में भी कष्ट।

दूसरों को कष्टनरकप्रेत योनि
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छल करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

छल करने वाले को — तमिश्रम (पिटाई), गर्म रेत-अंगारे-काँटे, शाल्मी-वृक्ष (छल से धन)। 'मित्रघाती → गिद्ध योनि, क्रय में धोखा → उल्लू।'

छलतमिश्रमअसिपत्रवन
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हिंसा करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

हिंसा करने वाले को — कुंभीपाक (खौलता तेल), क्रीमिक (कीट), सूलप्रोत (लोहे के शूल), लोहशंकु (लोहे की कीलें)। 'जो करोगे वही भोगोगे' — पुनर्जन्म में शिकार बनना।

हिंसाकुंभिपाकक्रीमिक
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ईर्ष्या करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

ईर्ष्यालु को — रौरव नरक (लालची-ईर्ष्यालु), संधांश नरक (निंदा पर नाखूनों से खरोंचना)। 'दूसरों के गुणों में दोष देखने वाले नरकगामी।' पुनर्जन्म में अभाव।

ईर्ष्यारौरवसंधांश
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क्रोध करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

क्रोध करने वाले को — लोहशंकु (निर्दोष-हत्या पर), रौरव (पत्नी-पीड़न पर), सुघोर्म (अन्याय पर खौलता तेल)। पुनर्जन्म में उसी हिंसा का शिकार।

क्रोधलोहशंकुरौरव
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लोभ करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

लोभी को — रौरव नरक (लालची-ईर्ष्यालु), तमिश्रम (धन-हड़पने वाले), कुड्म (केवल अपना पेट भरने वाले)। पुनर्जन्म में दरिद्रता। 'लोभ → नरक → दरिद्रता।'

लोभरौरवतमिश्रम
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अधर्म करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

अधर्म करने वाले को — अंधतामिस्त्र (परम अंधकार), विदीर्ण (अंग-भंग), तामिस्त्र-रौरव। 'अधर्म से परिवार पोषण → अंधतामिस्त्र।' व्यसनों में लिप्त → नरक।

अधर्मअंधतामिस्त्रविदीर्ण
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दान में दोष करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

दान में दोष पर — श्राद्ध में अपवित्र अन्न पर श्वेतकुष्ठ, गलत पंडित से श्राद्ध पर नरक। दान में अहंकार का फल अपूर्ण। 'निंदक-नशेड़ी पंडित से कर्म करवाने वाला नरकगामी।'

दान में दोषनरकश्राद्ध
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दान में कपट करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

दान में कपट पर — तमिश्रम नरक (पिटाई), ब्राह्मण-अतिक्रमण पर नरक+जन्मान्ध। 'प्रतिज्ञा करके दान न देने वाला सियार।' अशुद्ध पात्र से श्राद्ध — पितरों को नरक।

दान में कपटनरकछल
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दान न करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

दान न करने वाले को — कुड्म-कालसूत्र-पूतिमृत्तिक नरक, वैतरणी की गंदगी, यममार्ग पर भूख-प्यास। 'दान न देने से दरिद्रता → पाप → नरक → दरिद्रता' — यह दुष्चक्र।

दान न करनावैतरणीकुड्म
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ब्राह्मण को कष्ट देने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

ब्राह्मण को कष्ट देने पर — वैतरणी, अंगारे-गर्म रेत (ब्राह्मण-पीड़न), कुंभीपाक (ब्रह्महत्या)। 'ब्राह्मण को पैर मारने वाला लूला-लंगड़ा।' ब्राह्मण-कलह बढ़ाने वाला भी नरकगामी।

ब्राह्मण कष्टवैतरणीनरक
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अतिथि का अपमान करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

अतिथि-अपमान पर — घोर नरक, वैतरणी। यमदूत का उलाहना — 'अतिथि को नमस्कार नहीं किया।' 'भूखे अतिथि को लौटाने वाला नरकगामी।' बुजुर्ग-अपमान पर आग में खाल निकलने तक दंड।

अतिथि अपमाननरकयमदूत
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माता-पिता का अपमान करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

माता-पिता अपमान पर — घोर नरक, इस जन्म में दुर्भाग्य-रोग। पुनर्जन्म में गर्भ में ही मृत्यु। 'माता-पिता देवताओं के समान — उनका अपमान = देव-अपमान।'

माता-पिता अपमाननरकगर्भ में मृत्यु
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गुरु का अपमान करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

गुरु अपमान पर — महापातक नरक (कीड़े खाते हैं), वैतरणी। पुनर्जन्म में ब्रह्मराक्षस योनि, कुष्ठ रोग। 'गुरु का अपमान = नरक के द्वार।'

गुरु अपमानमहापातकब्रह्मराक्षस
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धर्म का अपमान करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

धर्म अपमान पर — अंधतामिस्त्र नरक (परम अंधकार), विदीर्ण नरक (अंग-भंग), तप्तलोहमय (तपता लोहा), प्रेत योनि। 'पापशीला नरा यान्ति दुखेन यमयातनाम।'

धर्म अपमानअंधतामिस्त्रविदीर्ण
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शास्त्र का अपमान करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

शास्त्र अपमान पर — 'वेद-निन्दा करने वाले नास्तिक नरक में गिरते हैं।' विदीर्ण नरक (अंग-भंग), निर्भक्षण नरक (बीच से चीरना)। शास्त्र-विरोध = धर्म-विरोध।

शास्त्र अपमाननरकनास्तिक
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देवता का अपमान करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

देव अपमान पर — घोर नरक, विदीर्ण नरक (अंग-भंग), तप्तलोहमय (तपता लोहा), ईश्वर में अविश्वास पर प्रेत योनि। 'पंच-देव पूजा न करने वाले नरकगामी।'

देव अपमाननरकविदीर्ण
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पवित्र वस्तुओं का अपमान करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

पवित्र वस्तु अपमान पर — लालभोजन नरक (मांस), सौचावट नरक (मल में), तप्तलोहमय (तपता लोहा), मंदिर-संपत्ति हरण पर वैतरणी, वन-नाश पर वैतरणी।

पवित्र वस्तु अपमाननरकसौचावट
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विश्वासघात करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

विश्वासघाती को — असिपत्रवन नरक (तलवार-पत्ते काटते हैं), प्रेत योनि, तमिश्रम नरक। 'मित्रद्रोही = महापापी।' पुनर्जन्म में उल्लू योनि।

विश्वासघातअसिपत्रवनप्रेत योनि
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मिथ्या साक्ष्य देने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

मिथ्या साक्ष्य पर — रौरव नरक (ईख की तरह पेरना), अविची नरक (सर्वाधिक कठोर), शाल्मली नरक (काँटेदार पेड़)। पुनर्जन्म में अंधापन।

मिथ्या साक्ष्यरौरवअविची
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वचनभंग करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

वचनभंग करने वाले को — अविची नरक (झूठी कसम के समकक्ष), रौरव नरक, मित्र-धोखे पर असिपत्रवन। विश्वासघात पर प्रेत योनि। इस जन्म में सामाजिक अपमान।

वचनभंगनरकझूठी कसम
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धोखा देने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

धोखेबाज को — तमिश्रम (बार-बार पिटाई), गर्म रेत-अंगारे-काँटे, गुरु-धोखे पर महापातक (कीड़े), मित्र-द्रोह पर असिपत्रवन। पुनर्जन्म में उल्लू योनि।

धोखातमिश्रममहापातक
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झूठ बोलने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

झूठ बोलने वाले को — अविची नरक (सर्वाधिक कठोर), रौरव (ईख की तरह पेरा जाना), शल्मली (काँटेदार पेड़), निर्भक्षण (बीच से चीरना)। पुनर्जन्म में अंधापन।

झूठअविचीरौरव
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भूमि हरण करने वाले को क्या दंड मिलता है?

भूमि हरण पर — अंगारे-गर्म रेत की यातना, वैतरणी की भयंकर यातना, तमिश्रम नरक (पिटाई)। इस जन्म में भी धन-नाश। प्रायश्चित — भूमिदान।

भूमि हरणनरकवैतरणी
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धन की चोरी करने वाले को किस नरक में भेजा जाता है?

धन चोरी पर — तमिश्रम नरक (बार-बार पिटाई), पयू नरक (मल में), शाल्मी-वृक्ष, ब्राह्मण-धन हरण पर वैतरणी। स्वर्ण-चोरी महापाप — घोर नरक। पुनर्जन्म में दरिद्रता।

धन चोरीतमिश्रमपयू नरक
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अन्न की चोरी करने वाले को किस नरक में भेजा जाता है?

अन्न चोरी पर — पयू नरक (मल में), खरभोजन नरक (काँटे), भोजन न बाँटने पर कीड़ों वाला नरक। यममार्ग पर भयंकर भूख। यमदूत का उलाहना — 'अन्न का दान क्यों नहीं दिया?'

अन्न चोरीनरकदंड
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जल की चोरी करने वाले को किस दंड का वर्णन है?

जल चोरी/दुरुपयोग — यमदूत का उलाहना, यममार्ग पर भयंकर प्यास, वैतरणी में रक्त-मवाद से प्यास। 'जल-स्रोत नष्ट करने वाले को नरक।' जलदान से प्रायश्चित।

जल चोरीवैतरणीदंड
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चोरी करने वाले को किस नरक में भेजा जाता है?

चोरी करने वाले को — पयू नरक (मल में), तमिश्रम नरक (बार-बार पिटाई), शाल्मी-वृक्ष (छल से धन)। स्वर्ण-चोरी महापाप — घोर नरक। पुनर्जन्म में दरिद्रता।

चोरीपयू नरकतमिश्रम
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पशुहत्या करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

पशुहत्यारे को — कुंभीपाक (खौलता तेल), क्रीमिक (कीट काटते हैं), सूलप्रोत (लोहे के शूल), तामिस्र (पिटाई)। पुनर्जन्म में पशु योनि। 'हिंसा को जीवनशैली बनाना = कुंभीपाक।'

पशुहत्याकुंभिपाकक्रीमिक
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बालहत्या करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

बालहत्यारे को — वैतरणी की यातना, लोहशंकु नरक (लोहे की कीलें), घोर नरक में असहनीय यातनाएं। पुनर्जन्म में नपुंसक योनि। 'निर्दोष को कष्ट = आत्मा का पतन।'

बालहत्यानरकवैतरणी
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स्त्रीहत्या करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

स्त्रीहत्यारे को — वैतरणी की भीषण यातना, घोर नरक में असहनीय यातनाएं। पुनर्जन्म में चांडाल योनि। गर्भपात भी स्त्रीहत्या समकक्ष — नपुंसक जन्म।

स्त्रीहत्यानरकचांडाल योनि
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गुरुहत्या करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

गुरुहत्यारे को — महापातक नरक (कीड़े खाते हैं), वैतरणी की यातना, कुंभीपाक जैसे भयंकर नरक। पुनर्जन्म में ब्रह्मराक्षस योनि। 'गुरु का अपमान = नरक के द्वार।'

गुरुहत्यामहापातकवैतरणी
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ब्रह्महत्या करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

ब्रह्महत्यारे को — वैतरणी में भीषण यातना, फिर कुंभीपाक नरक (जलती रेत और खौलता तेल)। 'ब्रह्महत्या सबसे बड़ा पाप।' भूमिदान और वृषोत्सर्ग से प्रायश्चित संभव।

ब्रह्महत्याकुंभिपाकवैतरणी
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नरक के कष्टों का उद्देश्य क्या है?

नरक के कष्टों का उद्देश्य — आत्मा की शुद्धि, कर्म-न्याय की पूर्ति, पाप से सबक और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करना। 'नरक शिक्षा-स्थल है — सजा-स्थल नहीं।' धर्माचरण की प्रेरणा देना।

नरकउद्देश्यआत्म-शुद्धि
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नरक के कष्टों का अंत कब होता है?

नरक के कष्टों का अंत — पाप-फल पूरा भोगने पर। 'नरक शाश्वत नहीं।' पुनर्जन्म मिलता है। परिजनों के वृषोत्सर्ग-गया-श्राद्ध से काल कम हो सकता है। पाप की मात्रा के अनुसार हजारों-लाखों वर्ष।

नरककष्ट का अंतपाप-फल
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नरक में जीव को किस प्रकार की आग में डाला जाता है?

नरक में अग्नि-प्रकार — रौरव (अग्निकुंड), कुंभीपाक (खौलता तेल), कालसूत्र (तप्त भूमि), तप्तलोहमय (तपता लोहा), तप्तकुंभ (खौलता बर्तन), सूलप्रोत (ज्वालाएँ)। 'जलती रहती है पर भस्म नहीं।'

नरकआगप्रकार
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नरक में जीव को मरने क्यों नहीं दिया जाता?

नरक में मृत्यु नहीं — क्योंकि पाप-फल पूरा भोगना है, आत्मा शाश्वत है (नष्ट नहीं होती), शुद्धि-प्रक्रिया पूर्ण करनी है। 'जलती रहती है पर भस्म नहीं होती।'

नरकमृत्यु नहींकारण
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नरक में जीव को बार-बार क्यों कष्ट दिया जाता है?

बार-बार कष्ट इसलिए — पाप-फल पूर्ण होने तक, आत्मा की क्रमिक शुद्धि के लिए, न्याय के पूर्ण निर्वाह के लिए। 'यातना तब तक — जब तक सारे पापों का हिसाब पूरा नहीं।' मृत्यु नहीं — इसीलिए बार-बार।

नरकबार-बार कष्टकारण
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महा रौरव नरक में जीव को कैसे कष्ट मिलता है?

महारौरव में — रौरव से और तीव्र यातना। बड़े रुरु जीव, अधिक अग्नि, अधिक लंबी अवधि। निर्दोष-पीड़कों के लिए — 'कल्पान्त तक नारकीय यातना।'

महा रौरवयातनानरक
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शूकरमुख नरक में जीव को कैसे पीटा जाता है?

शूकरमुख में — सूअर के मुख वाले भयंकर प्राणी आत्मा को नोचते-काटते हैं। मृत्यु नहीं — बार-बार पुनर्जागरण और पुनः नोचना। 'जिसने स्त्री को पीड़ा दी — उसे पशु नोचते हैं।'

शूकरमुख नरकयातनासूअर
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शाल्मली नरक में कांटों का क्या वर्णन है?

शाल्मली नरक के काँटे — 5 योजन विस्तृत, अग्नि-दीप्त वृक्ष पर तलवार जैसे तीखे काँटे। नीचे मुख करके साँकलों में बाँधकर लटकाया जाता है, भूखे-प्यासे पीटे जाते हैं। 'कोई रक्षक नहीं।'

शाल्मली नरककाँटेवृक्ष
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जीवन एवं मृत्यु — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

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जीवन एवं मृत्यु को गहराई से समझने का तरीका

जीवन एवं मृत्यु प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

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