विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में शूकरमुख नरक की यातना-विधि का वर्णन है।
सूअर नोचते हैं — 'सूकरमुख नरक में स्त्री का अपमान करने वालों को सूअर नोचते हैं।' यह सबसे प्रत्यक्ष वर्णन है।
सूकरमुख का अर्थ — 'शूकर' = सूअर और 'मुख' = मुख/मुँह। यह नरक सूअर के मुख वाले भयंकर प्राणियों से भरा है जो आत्मा को नोचते-काटते रहते हैं।
शारीरिक यातना — सूअर अत्यंत शक्तिशाली जानवर है। उसके दाँत और थूथन से नोचे जाने की पीड़ा असहनीय है। शूकरमुख नरक में यही यातना बार-बार दी जाती है।
मृत्यु नहीं — नोचे जाने के बाद भी आत्मा नष्ट नहीं होती। वह पुनः जीवित होती है और सूअर पुनः नोचते हैं।
कर्म-न्याय — 'जिसने स्त्री को पशु की तरह समझा और उसे पीड़ा दी, उसे नरक में पशु (सूअर) नोचते हैं।' यह कर्म-न्याय का सर्वोत्तम उदाहरण है।





