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यातना प्रश्नोत्तरी — 30 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित यातना विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 30 प्रश्न

पौराणिक ज्ञान

गरुड़ पुराण में कितनी यातनाएं बताई गई हैं?

गरुड़ पुराण: 28 प्रमुख नर्क (तामिस्र, रौरव, कुंभीपाक आदि)।: 84 लाख नर्क भी कहे गए। कर्म अनुसार यातना। उद्देश्य: भय नहीं — पाप से बचने की प्रेरणा। प्रतीकात्मक वर्णन।

गरुड़ पुराणनर्कयातना
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यममार्ग का वातावरण कैसा है?

यममार्ग तपता, छाया-विहीन, भयावह और भूख-प्यास व यातना से भरा मार्ग है।

यममार्गवातावरणगरुड़ पुराण
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यममार्ग में आत्मा का शरीर कैसे पीड़ित होता है?

यममार्ग में आत्मा का शरीर खाया, फाड़ा और भेदा जाता है, फिर भी वह दुख अनुभव करता रहता है।

यममार्गआत्मा का शरीरयातना
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

पिण्डज शरीर से आत्मा क्या अनुभव करती है?

पिण्डज शरीर से आत्मा यममार्ग के शुभ-अशुभ फल और यातनाएँ अनुभव करती है।

पिण्डज शरीरयममार्गशुभ अशुभ फल
लोक

पाताल और नरक में क्या फर्क है?

पाताल भोग-विलास का स्थान है जहाँ स्वर्ग से भी अधिक सुख है। नरक दंड का स्थान है जहाँ पापियों को यातना मिलती है। नरक पातालों से भी नीचे है।

पातालनरकफर्क
जीवन एवं मृत्यु

महा रौरव नरक में जीव को कैसे कष्ट मिलता है?

महारौरव में — रौरव से और तीव्र यातना। बड़े रुरु जीव, अधिक अग्नि, अधिक लंबी अवधि। निर्दोष-पीड़कों के लिए — 'कल्पान्त तक नारकीय यातना।'

महा रौरवयातनानरक
जीवन एवं मृत्यु

शूकरमुख नरक में जीव को कैसे पीटा जाता है?

शूकरमुख में — सूअर के मुख वाले भयंकर प्राणी आत्मा को नोचते-काटते हैं। मृत्यु नहीं — बार-बार पुनर्जागरण और पुनः नोचना। 'जिसने स्त्री को पीड़ा दी — उसे पशु नोचते हैं।'

शूकरमुख नरकयातनासूअर
जीवन एवं मृत्यु

असिपत्रवन नरक में जीव को कैसे घायल किया जाता है?

असिपत्रवन में — तलवार जैसे तीखे पत्तों वाले 2000 योजन के वन में दौड़ाया जाता है, पत्ते अंगों को काटते हैं। मित्र-द्रोही और घर में आग लगाने वाले पहले अग्निकुंड में, फिर इस वन में।

असिपत्रवन नरकयातनातलवार जैसे पत्ते
जीवन एवं मृत्यु

कालसूत्र नरक में जीव को कैसे जलाया जाता है?

कालसूत्र में — आग पर चलाया जाता है। तप्त-लोह जैसी धधकती भूमि पर चलना पड़ता है — ऊपर से भी अग्नि। 'समय बर्बाद करने वाले को कालसूत्र की आग।' पाप-फल तक यातना जारी।

कालसूत्र नरकयातनाआग
जीवन एवं मृत्यु

रौरव नरक में जीव को कैसे काटा जाता है?

रौरव में — रुरु नामक भयानक जीव नोचता-काटता है, झूठी गवाही वाले को ईख की तरह पेरा जाता है। अग्निकुंड में जलाया जाता है। 'रौरव नाम रुरु जीव के कारण।'

रौरव नरकयातनारुरु जीव
जीवन एवं मृत्यु

शाल्मली नरक में क्या होता है?

शाल्मली नरक में — साँकलों से उल्टा लटकाकर पिटाई, वृक्ष के काँटे चुभना, भूख-प्यास की तीव्र पीड़ा और कोई रक्षक नहीं। परस्त्रीगामी और पति को दोष लगाने वाली स्त्री यहाँ पीड़ित होती है।

शाल्मली नरकयातनाशाल्मली वृक्ष
जीवन एवं मृत्यु

असिपत्रवन नरक में किस प्रकार की यातना दी जाती है?

असिपत्रवन में — तलवार-पत्तों से अंग छिन्न-भिन्न, दावाग्नि, भयावह पक्षियों का आक्रमण, सिंह-व्याघ्र-कुत्तों द्वारा भक्षण। पहले अग्नि यातना, फिर छाया माँगने पर असिपत्रवन।

असिपत्रवन नरकयातनातलवार पत्ते
जीवन एवं मृत्यु

महा रौरव नरक में क्या होता है?

महारौरव में — रौरव से अधिक विषैले रुरु सर्पों का निरंतर दंश, तीव्र अग्नि-यातना, रौरव से अधिक लंबा दंड-काल। 'निर्दोष की हत्या करने वालों के लिए' — रौरव से भी कठोर दंड।

महारौरव नरकयातनारुरु सर्प
जीवन एवं मृत्यु

रौरव नरक में क्या कष्ट मिलता है?

रौरव नरक में — विशाल अग्निकुंड, जलती भूमि, लोहे के तीरों से बींधना, ईख की तरह पेरना और रुरु सर्पों का दंश। मृत्यु नहीं आती — यातना तब तक जारी।

रौरव नरककष्टयातना
जीवन एवं मृत्यु

क्या नरक में जीव को पुनः जीवित किया जाता है?

हाँ। नरक में जीव बार-बार जीवित किया जाता है — 'पिटाई तब तक जब तक दंड अवधि समाप्त नहीं।' बेहोश होने पर यमदूत जगाते हैं। पाप-फल पूरा होने पर शुद्ध होकर पुनर्जन्म।

नरकपुनः जीवितयातना
जीवन एवं मृत्यु

क्या नरक में जीव को काटा जाता है?

हाँ। नरक में — जलते तीरों से बींधना, संडासियों से माँस नोचना, पक्षियों की चोंच, लोहे की कीलें (लोहशंकु), बीच से चीरना (निर्भक्षण), काँटेदार पेड़ (शल्मली)।

नरककाटनायातना
जीवन एवं मृत्यु

क्या नरक में जीव को विश्राम मिलता है?

नरक में विश्राम नहीं — 'केवल तड़प ही उसका भाग्य।' बेहोश होने पर भी यमदूत जगाते हैं। 'नरक में दुःख की अधिकता है।' दानी पुण्यात्मा को यममार्ग पर कुछ राहत।

नरकविश्रामयातना
जीवन एवं मृत्यु

क्या नरक में जीव को मृत्यु नहीं आती?

नरक में मृत्यु नहीं — 'आत्मा जलती रहती है पर भस्म नहीं होती।' पाप-फल पूरा भोगने तक यातना जारी। बेहोश होने पर भी यमदूत जगाते हैं। पाप-फल समाप्त होने पर अगले जन्म।

नरकमृत्यु नहींयातना
जीवन एवं मृत्यु

क्या महापापी को अधिक कष्ट मिलता है?

हाँ। महापापी को — साधारण पापी से कहीं अधिक कष्ट। भयंकर नरक (रौरव-महारौरव), वैतरणी में अकेले पार करने की पीड़ा, यमदूतों का अत्यंत कठोर व्यवहार और शाल्मली वृक्ष की अतिरिक्त यातना।

महापापीकष्टयातना
जीवन एवं मृत्यु

नरक में जीव को क्या मिलता है?

नरक में जीव को — पाप के अनुसार विशिष्ट दंड, शारीरिक यातनाएँ (जलाना-काटना-नोचना), भूख-प्यास, पापों का पश्चाताप और यमदूतों की निरंतर प्रताड़ना मिलती है। मृत्यु नहीं आती।

नरकयातनापापफल
जीवन एवं मृत्यु

दान न करने से क्या परिणाम होता है?

दान न करने से — यममार्ग पर भूख-प्यास की यातना, यमदूत का उलाहना और अतिरिक्त दंड, वैतरणी में नाक में कांटे से घसीटा जाना, नरक में भोग और परिजन न करें तो प्रेत कल्पान्त तक भटकता है।

दानअभावयातना
जीवन एवं मृत्यु

दान के बिना क्या होता है?

दान के बिना — यममार्ग पर भूख-प्यास की यातना, वैतरणी में नाक में कांटा फंसाकर खींचा जाना, प्रेत-दशा, नरक में अतिरिक्त यातना और अगले जन्म में अभाव। यमदूत 'अन्न-जल दान न करने' का उलाहना देते हैं।

दानअभावयातना
जीवन एवं मृत्यु

नरक में जीव को किस रूप में दंड दिया जाता है?

नरक में दंड चार रूपों में — शारीरिक (पिटाई, जलाना), पारिस्थितिक (खौलता तेल, अंधकार), जीव-जंतु द्वारा (कुत्ते, सर्प, राक्षस) और मनोवैज्ञानिक (पापों की याद, अकेलापन)।

नरकदंड रूपयातना
जीवन एवं मृत्यु

नरक में प्रवेश के बाद क्या होता है?

नरक में प्रवेश के बाद दक्षिण द्वार पर प्रथम यातना, नरक के यमदूतों को सौंपना, पापों की याद दिलाना, निरंतर दंड और अंत में पाप-दंड पूर्ण होने पर पुनर्जन्म — यह क्रमबद्ध प्रक्रिया है।

नरकप्रवेशयातना

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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