विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में असिपत्रवन नरक की यातनाओं का अत्यंत भयावह वर्णन है।
तलवार-पत्तों से अंग-भंग — 'असिपत्र के पत्तों से वह जीव उस वन में छिन्न-भिन्न हो जाता है।' तलवार जैसे पत्तों से गुजरते हुए पापी के अंग कट जाते हैं।
चरण-क्रम — गरुड़ पुराण के चतुर्थ अध्याय में — 'जो महापापी घर, गाँव तथा जंगल में आग लगाता है, यमदूत उसे ले जाकर अग्निकुंडों में पकाते हैं। इस अग्नि में जले हुए अंगवाला वह पापी जब छाया की याचना करता है तो यमदूत उसे असिपत्र नामक वन में ले जाते हैं।' — अर्थात् पहले अग्नि यातना, फिर असिपत्रवन।
दावाग्नि — 'उसमें चारों ओर दावाग्नि व्याप्त है।' — चारों ओर से आग भी जलती रहती है।
पक्षियों का आक्रमण — 'वह वन कौओं, उल्लुओं, वटों, गीधों, सरघों तथा डाँसों से व्याप्त है।' ये पक्षी कटे हुए अंगों को और नोचते हैं।
सिंह, व्याघ्र और कुत्ते — 'वह पापी कहीं सिंहों, व्याघ्रों और भयंकर कुत्तों द्वारा खाया जाता है।'





