विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में पश्चाताप के बिना पाप का फल और भी भयंकर होता है।
एक नरक से दूसरा — 'सदा पापकर्मों में लगे हुए, शुभ कर्म से विमुख प्राणी एक नरक से दूसरे नरक को, एक दुःख के बाद दूसरे दुःख को प्राप्त होते हैं।' पश्चाताप के बिना यह श्रृंखला टूटती नहीं।
कोई राहत नहीं — पश्चाताप न करने वाले को नरक में कोई राहत नहीं मिलती। 'यह यातना हजारों-लाखों वर्षों तक चल सकती है।'
मृत्युकाल का अवसर गँवाना — 'मृत्यु के समय जो भगवान का नाम लेता है वह मुक्ति के मार्ग पर अग्रसर होता है।' पश्चाताप न करने वाला यह अंतिम अवसर भी खो देता है।
घोर नरक — बड़े पापों और पश्चाताप के पूर्ण अभाव के लिए रौरव, महारौरव, कुंभीपाक जैसे घोर नरक।
गरुड़ पुराण का संदेश — 'नरक एक शिक्षा-स्थल है।' जो पश्चाताप नहीं करता, वह इस शिक्षा में देर से सीखता है।





