विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में अंधतामिस्र नरक को 'परम अंधकार' का नरक बताया गया है।
परिवार का अधर्म से पोषण — गरुड़ पुराण के तृतीय अध्याय में — 'जो व्यक्ति अधर्म से कुटुम्ब के भरण-पोषण के लिए प्रयत्नशील है, वह अंधतामिस्त्र नामक नरक में जाता है।'
चुगली और पर-निंदा — 'अंधतोमिस्र नरक में चुगली करने वालों को अंधेरे में तड़पाया जाता है।'
पति-पत्नी को धोखा (गंभीर रूप) — गरुड़ पुराण में — 'तामिस्र और महातामिस्र तथा रौरवादि नरकों की यातनाएं स्त्री और पुरुष पारस्परिक संग से निर्मित करके भोगते हैं।' जो व्यक्ति तामिस्र से अधिक गहरे दुराचार में हो, उसे अंधतामिस्र भेजा जाता है।
अंधतामिस्र का विशेष — तामिस्र से भी अधिक गहरा अंधकार। यहाँ जीव को केवल अंधकार में छोड़ा जाता है जहाँ कोई भी दिशा, सहारा या प्रकाश नहीं होता।
अंतर — तामिस्र में पिटाई होती है जबकि अंधतामिस्र में परम एकाकीपन और अंधकार की यातना दी जाती है।



