विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के तृतीय और चतुर्थ अध्याय में शाल्मली नरक के पात्रों का वर्णन है।
परस्त्री-गमन — गरुड़ पुराण के चतुर्थ अध्याय में — 'जो स्त्री अपने पति को दोष लगाकर परपुरुष में आसक्त होने वाली है — ये सभी और इस प्रकार के अन्य पापी भी शाल्मली वृक्ष द्वारा बहुत ताड़ना प्राप्त करते हैं।'
झूठी गवाही — 'शल्मली नरक में झूठी गवाही देने वालों को काँटेदार पेड़ पर चढ़ाया जाता है।'
छल से धन अर्जन — 'छल से धन का अर्जन करने वाले, चोरी द्वारा आजीविका चलाने वाले — ये वैतरणी तटस्थित शाल्मी-वृक्ष में जाते हैं।'
शाल्मली का स्वरूप — गरुड़ पुराण में — 'वहाँ जलती हुई अग्नि के समान प्रभा वाला एक विशाल वृक्ष है, जो पाँच योजन में फैला हुआ है तथा एक योजन ऊँचा है। उस वृक्ष में नीचे मुख करके उसे साँकलों से बाँधकर वे दूत पीटते हैं।'



