विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में अतिथि-सत्कार को अनिवार्य धर्म बताया गया है और इसके उल्लंघन को नरक का कारण।
यमदूत का उलाहना — गरुड़ पुराण के तृतीय अध्याय में यमदूत पापियों से कहते हैं — 'तुम लोगों ने अतिथि को नमस्कार नहीं किया और पितरों का तर्पण नहीं किया।' अतिथि-अपमान यमलोक में दंड का कारण है।
घोर नरक — 'जो व्यक्ति अपनी पत्नी, बच्चों, नौकरों और मेहमानों को बिना खाना खिलाए ही खाना खाता है — ऐसे लोग नरक में जाते हैं।'
वैतरणी — 'भूख-प्यास से थककर जो याचक किसी के घर जाता हो और उसे वहाँ से अपमानित होकर लौटना पड़े — ऐसे अपमान करने वाले नरक में जाते हैं।'
बड़े-बुजुर्गों का अपमान — 'बड़े-बुजुर्गों का अपमान करने पर नरक में पापी को आग में तब तक डुबोकर रखा जाता है जब तक कि उसकी खाल नहीं निकल जाती।'
गरुड़ पुराण में — 'अतिथि देवो भव' — इसी सिद्धांत का गरुड़ पुराण कड़ाई से पालन करने को कहता है।





