विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में अन्न के प्रति पाप के दंड का वर्णन है।
यमदूत का उलाहना — 'अरे दुराचारियों! सुलभ होने वाले भी जल और अन्न का दान कभी क्यों नहीं दिया?' जो अन्न की चोरी करता है और खुद दान भी नहीं करता — उसे यह उलाहना मिलता है।
पयू नरक — 'चोरी करने वालों को पयू नरक में मल में गिराया जाता है।' अन्न की चोरी भी चोरी ही है।
खरभोजन नरक — 'हिंसा से कमाया अन्न खाने वालों को खरभोजन नरक में काँटे खाने को दिए जाते हैं।' अनुचित तरीके से प्राप्त अन्न का भोग भी पाप है।
दूसरों का भोजन छीनना — 'जो लोग दूसरों के साथ भोजन साझा नहीं करते — उन्हें कीड़ों और गंदगी से भरे नरक में डाल दिया जाता है।'
यममार्ग पर भूख — जिसने अन्न की चोरी की, उसे यममार्ग पर भयंकर भूख की पीड़ा सहनी पड़ती है।





