विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में जल से संबंधित पापों और दंडों का विशेष उल्लेख है।
यमदूत का उलाहना — गरुड़ पुराण में यमदूत पापियों से कहते हैं — 'सुलभ होने वाले भी जल और अन्न का दान कभी क्यों नहीं दिया?' जल को अनुचित रूप से लेने और दूसरों को वंचित करने वाले को यह उलाहना मिलता है।
यममार्ग पर भयंकर प्यास — जिसने जल की चोरी की या जल-स्रोत नष्ट किए, उसे यममार्ग पर तीव्र प्यास से पीड़ित होना पड़ता है। 'वहाँ कहीं जल भी नहीं दिखता।'
वैतरणी की यातना — जिसने जलदान नहीं किया, उसे वैतरणी नदी में रक्त-मवाद से प्यास बुझानी पड़ती है।
जल-स्रोत नष्ट करना — 'जो व्यक्ति कुएँ, तालाब या पानी के स्रोत को नुकसान पहुँचाता है — उसे नरक में जाना पड़ता है।' वन और वाटिका नष्ट करने वाले को वैतरणी का विधान है।
प्रायश्चित — जलदान, कुआँ-तालाब बनवाना — ये इस पाप के प्रायश्चित हैं।





