विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में ब्रह्महत्या को सर्वोच्च पाप बताया गया है और इसके लिए सर्वाधिक भयंकर नरक निर्धारित है।
कुंभीपाक नरक — 'गरुड़ पुराण के अनुसार ब्राह्मण की हत्या करने पर आत्मा को कुम्भीपाक नरक में डाल दिया जाता है, जहाँ उसे आग से धधकती रेत में फेंक दिया जाता है।' यह खौलते तेल और जलती रेत की यातना है।
वैतरणी नदी — गरुड़ पुराण के चतुर्थ अध्याय में — 'जो ब्राह्मणों की हत्या करने वाले हैं — वे वैतरणी में महान दुःख भोग करते हैं।' वैतरणी पार करना पहली भीषण यातना है।
इसके बाद घोर नरक — वैतरणी के बाद ब्रह्महत्यारे को कुंभीपाक और फिर अन्य घोर नरकों में भेजा जाता है। 'एक नरक से दूसरे नरक' — यह क्रम चलता रहता है।
प्रायश्चित — गरुड़ पुराण में — 'भूमिदान से ब्रह्महत्या जैसे महापाप नष्ट होते हैं।' वृषोत्सर्ग से भी 'ब्रह्महत्यारा पापमुक्त हो सकता है।'





