विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में दूसरों को कष्ट देने के विभिन्न रूपों और उनके नरकों का वर्णन है।
प्रेत योनि — गरुड़ पुराण में — 'जो व्यक्ति निर्बल को सताता है — ऐसा व्यक्ति प्रेत योनि में अवश्य जाता है और उसे अनेकानेक नारकीय कष्ट भोगना पड़ता है।'
कर्म के अनुरूप नरक — गरुड़ पुराण में — 'जो असहाय और जरूरतमंद की मदद नहीं करता और कमजोर को सताता है, वो सीधे नरक में जाता है।'
वैतरणी — 'ऋण लेकर उसे न लौटाने वाले — धरोहर को हड़पने वाले — वे वैतरणी में दुःख भोगते हैं।' ऋण-दंड भी दूसरों को कष्ट का रूप है।
इस जन्म में भी — 'कुछ पापों का फल इसी जन्म में मिलता है।' दूसरों को कष्ट देने वाले को इसी जीवन में परेशानी, रोग और शत्रुता का सामना करना पड़ता है।
कर्म-न्याय — 'नरक में जो भी आत्मा जाती है, उसे उसके जीवन में किए गए पापों के अनुसार ही दंड मिलता है।'





