विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में पाप छुपाने का कोई उपाय नहीं है — यह एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है।
श्रवण देवता — गरुड़ पुराण के तृतीय अध्याय में — 'श्रवण और श्रवणियाँ — यह आमतौर पर मनुष्य जो छिपाकर करता है उसके बारे में सब चित्रगुप्त से बताते हैं।' कोई पाप छुपाया नहीं जा सकता।
गुप्त पाप — गरुड़ पुराण के चतुर्थ अध्याय में — 'गुप्तरूप से पाप करने वाले — ये वैतरणी में महान दुःख भोग करते हैं।' गुप्त पाप और छुपाया गया पाप — दोनों का दंड वैतरणी में।
चित्रगुप्त का लेखा — 'यमलोक में चित्रगुप्त के पास प्रत्येक जीव के सभी कर्मों का लेखा है — बड़े और छोटे, प्रकट और गुप्त — सभी।' पाप छुपाने से केवल इस जन्म में बचाव, परलोक में नहीं।
आत्म-दंड — गुप्त पाप का एक परिणाम यह भी है कि वह पाप अंदर से व्यक्ति को खाता रहता है। यमलोक में यह पाप उजागर होकर और अधिक दंड का कारण बनता है।





