विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में शास्त्र और वेद के अपमान को अत्यंत गंभीर पाप माना गया है।
घोर नरक — 'वेद की निन्दा करने वाले नास्तिक — निश्चय ही नरकों में गिरते हैं।' गरुड़ पुराण के चतुर्थ अध्याय में यह स्पष्ट उल्लेख है।
विदीर्ण नरक — 'धर्म-विरोधियों के अंग तोड़ दिए जाते हैं।' शास्त्र-विरोध और वेद-निंदा धर्म-विरोध के ही रूप हैं।
निर्भक्षण नरक — 'झूठी निंदा करने वालों को बीच से चीर दिया जाता है।' शास्त्रों की निंदा भी झूठी निंदा की श्रेणी में है।
शास्त्र अध्ययन से रहित ब्राह्मण — 'शास्त्र अध्ययन से रहित ब्राह्मण, ब्रह्मकर्म से च्युत' — इनके लिए नरक का विधान है।
इस जन्म में — शास्त्र-अपमान से व्यक्ति ज्ञान से वंचित रहता है और जीवन में दिशाहीन होता है।





