विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में बालहत्या को महापाप माना गया है जिसके लिए भयंकर नरक निर्धारित है।
वैतरणी — गरुड़ पुराण के चतुर्थ अध्याय में — 'बाल हत्यारे — ये वैतरणी में महान दुःख भोग करते हैं।' वैतरणी में रक्त-मांस-मवाद की नदी पार करना पड़ती है।
घोर नरक — 'भ्रूण, नवजात शिशु की हत्या करना या करवाना महापाप है। ऐसे व्यक्ति को मृत्यु के बाद नरक में असहनीय यातनाएं सहनी पड़ती हैं।'
लोहशंकु नरक — 'निर्दोष की हत्या करने वालों को लोहशंकु नरक में लोहे की कीलों से बींधा जाता है।' निर्दोष बालक की हत्या इस श्रेणी में आती है।
पुनर्जन्म में — 'जो लोग कन्याओं को गर्भ में मार डालने का पाप करते हैं, ऐसे जातक अगले जन्म में नपुंसक बनते हैं।' बालहत्यारे को अगले जन्म में भी गंभीर दंड मिलता है।
गरुड़ पुराण में — 'निर्दोष प्राणियों को कष्ट देना केवल पाप ही नहीं, आत्मा के पतन का मार्ग है।'





