विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में गुरु की हत्या या गुरु को कष्ट देना अत्यंत गंभीर पाप माना गया है।
महापातक नरक — 'महापातक नरक में गुरु को धोखा देने वालों को कीड़े खाते हैं।' गुरुहत्या, गुरु को धोखा देना — ये एक ही श्रेणी में आते हैं।
वैतरणी — गरुड़ पुराण के चतुर्थ अध्याय में — 'जो गुरु के धन को हरण करने वाले हैं — वे वैतरणी में महान दुःख भोग करते हैं।' गुरु को कष्ट देने वाले वैतरणी पार नहीं कर पाते।
ब्रह्मराक्षस योनि — 'गरुड़ पुराण में कहा गया है कि गुरु से कुतर्क करने वाला शिष्य अगले जन्म में जल रहित वन में ब्रह्मराक्षस बनता है।' गुरुहत्यारे का अगला जन्म भी अत्यंत हीन।
कुंभीपाक — गुरुहत्या ब्रह्महत्या के समकक्ष है — इसलिए कुंभीपाक जैसे नरक भी प्राप्त हो सकते हैं।
गरुड़ पुराण में — 'गुरु का अपमान यानी भगवान का अपमान। ऐसा करना नरक के द्वार खोलने जैसा है।'





