लोकगोहत्या करने वाले को वैतरणी और प्रेत योनि क्यों मिलती है?गोहत्या महापातक है; ऐसा पापी वैतरणी की यातना भोगकर प्रेत योनि में आता है।#गोहत्या#वैतरणी#प्रेत योनि
लोकगुरुपत्नी गमन का फल क्या बताया गया है?गुरुपत्नी गमन करने वाला शाल्मली नरक में कांटों से भरे जलते वृक्षों का दंड भोगकर प्रेत योनि में आता है।#गुरुपत्नी गमन#महापातक#शाल्मली नरक
लोकस्वर्ण चोरी करने वाला प्रेत योनि क्यों पाता है?स्वर्ण चोरी महापातक है; ऐसा जीव कुम्भीपाक नरक में दंड भोगकर प्रेत योनि में आता है।#स्वर्ण चोरी#प्रेत योनि#कुम्भीपाक
लोकसुरापान करने वाले को कौन सा दंड मिलता है?सुरापान करने वाला कुम्भीपाक या तपसुरी नरक में जाता है, जहाँ उसके मुख में खौलता पिघला धातु डाला जाता है।#सुरापान#महापातक#कुम्भीपाक
लोकब्रह्महत्या का प्रेत योनि से क्या संबंध है?ब्रह्महत्या महापातक है; ऐसा पापी महारव नरक की यातना के बाद प्रेत योनि में आता है।#ब्रह्महत्या#प्रेत योनि#महारव नरक
लोकमहापातक करने वाला प्रेत क्यों बनता है?महापातक करने वाला जीव पहले नरक यातना भोगता है और फिर तामसिक कर्मों के कारण प्रेत योनि में आता है।#महापातक#प्रेत योनि#नरक
लोकप्रेत बनने का मुख्य कारण क्या है?प्रेत बनने के मुख्य कारण हैं: पिण्डदान और श्राद्ध का अभाव, अकाल मृत्यु और महापातक जैसे घोर पाप।#प्रेत बनने का कारण#पिण्डदान#अकाल मृत्यु
फलश्रुति और लाभरुद्राभिषेक से पाप नष्ट होते हैं क्या?हाँ, रुद्राभिषेक सभी पापों का नाश करता है और महापातक को भी भस्म करने की शक्ति रखता है — रुद्राष्टाध्यायी के पाठ से कुंडली के पातक कर्म भी भस्म होते हैं।#पाप नाश#महापातक#रुद्राभिषेक फल
जीवन एवं मृत्युगुरु का अपमान करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?गुरु अपमान पर — महापातक नरक (कीड़े खाते हैं), वैतरणी। पुनर्जन्म में ब्रह्मराक्षस योनि, कुष्ठ रोग। 'गुरु का अपमान = नरक के द्वार।'#गुरु अपमान#महापातक#ब्रह्मराक्षस
जीवन एवं मृत्युधोखा देने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?धोखेबाज को — तमिश्रम (बार-बार पिटाई), गर्म रेत-अंगारे-काँटे, गुरु-धोखे पर महापातक (कीड़े), मित्र-द्रोह पर असिपत्रवन। पुनर्जन्म में उल्लू योनि।#धोखा#तमिश्रम#महापातक
जीवन एवं मृत्युगुरुहत्या करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?गुरुहत्यारे को — महापातक नरक (कीड़े खाते हैं), वैतरणी की यातना, कुंभीपाक जैसे भयंकर नरक। पुनर्जन्म में ब्रह्मराक्षस योनि। 'गुरु का अपमान = नरक के द्वार।'#गुरुहत्या#महापातक#वैतरणी