विस्तृत उत्तर
प्रेत बनने के मुख्य कारण शास्त्रों में तीन बताए गए हैं: ऊर्ध्वदैहिक संस्कारों का अभाव, अकाल या अप्राकृतिक मृत्यु, और घोर पाप कर्म। यदि मृत व्यक्ति का विधिपूर्वक अंत्येष्टि, श्राद्ध, पिण्डदान और सपिण्डीकरण न किया जाए, तो जीवात्मा प्रेत बन सकती है। गरुड़ पुराण में कहा गया है कि जो लोग पिण्डदान से वंचित रह जाते हैं, वे प्रेत रूप हो जाते हैं और कल्प के अंत तक निर्जन वनों में दुखी होकर भटकते रहते हैं। अकाल मृत्यु, जैसे जल में डूबना, अग्नि में जलना, सर्पदंश, विषपान, आत्महत्या या हत्या भी प्रेत योनि का कारण है। ब्रह्महत्या, सुरापान, स्वर्ण चोरी, गुरुपत्नी गमन और गोहत्या जैसे महापातक करने वाले जीव भी नरक यातना के बाद प्रेत योनि प्राप्त करते हैं।
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