विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में पवित्र कर्मों — व्रत, तीर्थ, देव-पूजा, श्राद्ध — का त्याग करना नरक का कारण बताया गया है।
शाल्मी-वृक्ष — गरुड़ पुराण के चतुर्थ अध्याय में — 'व्रत तथा तीर्थ का परित्याग करने वाले — ये वैतरणी तटस्थित शाल्मी-वृक्ष में जाते हैं।'
कुड्म और संबद्ध नरक — 'जो ईश्वर के निमित्त दान नहीं करते — कुड्मल जैसे नरक भोगने पड़ते हैं।'
यमदूत का उलाहना — तृतीय अध्याय में — 'कभी कोई तीर्थ-यात्रा नहीं की, देवताओं की पूजा भी नहीं की, गृहस्थाश्रम में रहते हुए भी हन्तकार नहीं निकाला।' — यह उलाहना पवित्र कर्मों के त्याग का दंड है।
प्रेत योनि — 'ईश्वर में विश्वास नहीं करने वाला प्रेत योनि में जाता है।' पवित्र कर्मों का त्याग ईश्वर-विमुखता का ही रूप है।
घोर नरक — 'जो मन्द पुरुष भगवान शिव, नारायण, सूर्य, गणेश की पूजा नहीं करते, वे नरक में जाते हैं।'





