विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में अधर्म के लिए अनेक नरकों का विधान है।
अंधतामिस्त्र — 'जो व्यक्ति अधर्म से कुटुम्ब के भरण-पोषण के लिए प्रयत्नशील है, वह अंधतामिस्त्र नामक नरक में जाता है।'
विदीर्ण — 'धर्म-विरोधियों के अंग तोड़ दिए जाते हैं।'
तामिस्त्र और रौरव — 'पुण्य तिथियों में, व्रत में, श्राद्ध के दिनों में संबंध बनाने वाले पाप के भागी होकर तामिस्त्र, अंधतामिस्त्र और रौरव नामक नरकों को भोगते हैं।'
गरुड़ पुराण का सीधा वचन — 'गरुड़ पुराण कहता है कि जो व्यक्ति अधर्म के मार्ग पर चलकर नरक में जाता है — वह दरिद्र योनि में जन्म लेता है।' अधर्म का दुष्चक्र।
इस जन्म में — 'जो शराब, मांस, गीत, जुए आदि व्यसनों में ही दिन-रात लगे रहते हैं — ऐसे लोगों को नरक ही प्राप्त होता है।'





