शिव महिमाशिव जी का तीसरा नेत्र किस कारण खुलता है?शिव का तीसरा नेत्र तब खुलता है जब अधर्म, अहंकार या सृष्टि पर भयंकर संकट आता है। कामदेव द्वारा तपस्या भंग करने पर, सती के आत्मदाह पर और त्रिपुरासुर वध के समय यह नेत्र खुला। यह नेत्र संहार, विवेक और ज्ञान का प्रतीक है।#शिव तीसरा नेत्र#कामदेव दहन#संहार
लोकलक्ष्मी जी क्यों रूठ जाती हैं?अहंकार, अधर्म और श्रम के अपमान से लक्ष्मी जी रूठती हैं।#लक्ष्मी#रूठना#अधर्म
जीवन एवं मृत्युअधर्म करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?अधर्म करने वाले को — अंधतामिस्त्र (परम अंधकार), विदीर्ण (अंग-भंग), तामिस्त्र-रौरव। 'अधर्म से परिवार पोषण → अंधतामिस्त्र।' व्यसनों में लिप्त → नरक।#अधर्म#अंधतामिस्त्र#विदीर्ण
जीवन एवं मृत्युअधर्म करने वाले को क्या दंड मिलता है?अधर्म करने वाले को — अंधतामिस्त्र नरक (परम अंधकार), विदीर्ण नरक (अंग-भंग), तप्तलोहमय (तपता लोहा)। मृत्यु में यमदूत पाश बाँधकर घसीटते हैं। इस जीवन में दुर्भाग्य।#अधर्म#दंड#अंधतामिस्त्र