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अधर्म से जुड़े सभी प्रश्न(8)

अधर्म पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 8 प्रश्न उपलब्ध हैं।

शिव महिमा

शिव जी का तीसरा नेत्र किस कारण खुलता है?

शिव का तीसरा नेत्र तब खुलता है जब अधर्म, अहंकार या सृष्टि पर भयंकर संकट आता है। कामदेव द्वारा तपस्या भंग करने पर, सती के आत्मदाह पर और त्रिपुरासुर वध के समय यह नेत्र खुला। यह नेत्र संहार, विवेक और ज्ञान का प्रतीक है।

#शिव तीसरा नेत्र#कामदेव दहन#संहार
धर्म और आचार

धर्म और अधर्म का सही अर्थ क्या है?

कुशल कर्म धर्म और अकुशल कर्म अधर्म है; जिससे अभीष्ट मिले वह धर्म और जिससे अनिष्ट मिले वह अधर्म है।

#धर्म#अधर्म#कुशल कर्म
ऋषि और मानस पुत्र

ब्रह्मा की बारह संतान कौन कही गई हैं?

नौ मानस पुत्रों के साथ संकल्प, धर्म और अधर्म मिलकर ब्रह्मा की बारह संतान कही गई हैं।

#ब्रह्मा की संतान#बारह संतान#संकल्प
श्रीमद्भागवत

कलियुग के मुख्य दोष क्या हैं?

असत्य, आलस्य, पाखंड, लोभ, सदाचार का अभाव और साधनों का सार घटना कलियुग के दोष बताए गए हैं।

#कलियुग#दोष#अधर्म
श्रीमद्भागवत

कलियुग में धर्म क्यों घट रहा है?

धर्म-क्षय का कारण सत्य, तप, शौच, दया, दान, साधना और सदाचार का घटना बताया गया है।

#कलियुग#धर्म#अधर्म
लोक

लक्ष्मी जी क्यों रूठ जाती हैं?

अहंकार, अधर्म और श्रम के अपमान से लक्ष्मी जी रूठती हैं।

#लक्ष्मी#रूठना#अधर्म
जीवन एवं मृत्यु

अधर्म करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

अधर्म करने वाले को — अंधतामिस्त्र (परम अंधकार), विदीर्ण (अंग-भंग), तामिस्त्र-रौरव। 'अधर्म से परिवार पोषण → अंधतामिस्त्र।' व्यसनों में लिप्त → नरक।

#अधर्म#अंधतामिस्त्र#विदीर्ण
जीवन एवं मृत्यु

अधर्म करने वाले को क्या दंड मिलता है?

अधर्म करने वाले को — अंधतामिस्त्र नरक (परम अंधकार), विदीर्ण नरक (अंग-भंग), तप्तलोहमय (तपता लोहा)। मृत्यु में यमदूत पाश बाँधकर घसीटते हैं। इस जीवन में दुर्भाग्य।

#अधर्म#दंड#अंधतामिस्त्र
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