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ब्रह्महत्या प्रश्नोत्तरी — 13 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित ब्रह्महत्या विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 13 प्रश्न

महापातक प्रायश्चित

ब्रह्महत्या का प्रायश्चित क्या है?

ब्रह्महत्या के लिए एक लाख अघोर मंत्र जप से मुक्ति कही गई है; दूसरे स्थान पर ऐसे नराधम के लिए दस लाख मानस जप भी बताया गया है।

ब्रह्महत्याप्रायश्चितअघोर मंत्र
महापातक प्रायश्चित

महापातक से मुक्ति कैसे बताई गई है?

महापातक से मुक्ति के लिए अघोर मंत्र जप, पंचगव्य-विधि, हवन, शिवस्नान, उपवास और गायत्री जप का विधान बताया गया है।

महापातकब्रह्महत्यासुरापान
लोक

ब्रह्महत्या का प्रेत योनि से क्या संबंध है?

ब्रह्महत्या महापातक है; ऐसा पापी महारव नरक की यातना के बाद प्रेत योनि में आता है।

ब्रह्महत्याप्रेत योनिमहारव नरक
भैरव परिचय

भैरव काशी के कोतवाल क्यों कहलाते हैं?

ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति काशी में मिली — तभी से भैरव काशी के कोतवाल और 'दंडपाणि' (हाथ में दंड धारण करने वाले) हुए जो काशी में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति के कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं।

काशी कोतवालदंडपाणिब्रह्महत्या
गुप्त रुद्राक्ष प्रयोग

१ मुखी रुद्राक्ष धारण करने के शास्त्रीय फल और लाभ क्या हैं?

१ मुखी रुद्राक्ष सांसारिक सुख, मोक्ष और ब्रह्म-हत्या जैसे पापों का नाश कर साधक को परम-तत्त्व में लीन करता है।

1 मुखी लाभमोक्षब्रह्महत्या
व्रत कथा

ब्रह्महत्या जैसा घोर पाप किस व्रत से दूर होता है?

ऋषि के निर्देश पर क्षत्रिय ने कामिका एकादशी का व्रत कर रात भर जागरण किया था। भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर उसे ब्रह्महत्या जैसे घोर पाप से मुक्त कर दिया।

ब्रह्महत्याप्रायश्चितपाप मुक्ति
पौराणिक कथा

कालभैरव पर लगा 'ब्रह्महत्या' का पाप कैसे दूर हुआ?

ब्रह्मा जी का सिर काटने के कारण कालभैरव पर ब्रह्महत्या का पाप लगा था। जब वे भिक्षाटन करते हुए काशी (वाराणसी) पहुंचे, तब वहां की पवित्र भूमि पर पैर रखते ही वे इस पाप से मुक्त हुए।

ब्रह्महत्याकपालमोचनकाशी
जीवन एवं मृत्यु

ब्रह्महत्या करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

ब्रह्महत्यारे को — वैतरणी में भीषण यातना, फिर कुंभीपाक नरक (जलती रेत और खौलता तेल)। 'ब्रह्महत्या सबसे बड़ा पाप।' भूमिदान और वृषोत्सर्ग से प्रायश्चित संभव।

ब्रह्महत्याकुंभिपाकवैतरणी
जीवन एवं मृत्यु

किस पाप के लिए कुंभिपाक नरक मिलता है?

कुंभिपाक नरक — ब्रह्महत्या, हिंसा को जीवनशैली बनाना, दूसरों की भूमि-संपत्ति हड़पना। 'गरम बालू, अंगारे और खौलते तेल' में यातना।

कुंभिपाकपापब्रह्महत्या
जीवन एवं मृत्यु

कुंभिपाक नरक में किसे डाला जाता है?

कुंभिपाक में — ब्राह्मण-हत्यारे, हिंसा को जीवनशैली बनाने वाले, दूसरों की संपत्ति हड़पने वाले और निर्दोष जीवों की बड़े पैमाने पर हत्या करने वाले भेजे जाते हैं।

कुंभिपाकपात्रब्रह्महत्या
पाप एवं दंड

ब्रह्महत्यारा, गाय-हत्यारा और कन्या-हत्यारा — तीनों चांडाल योनि में क्यों जाते हैं?

गरुड़ पुराण के पाँचवें अध्याय के अनुसार ये तीनों — ब्राह्मण, गाय और कन्या — धर्म के स्तंभ हैं। इन तीनों की हत्या समान गुरुता के पाप हैं, इसलिए तीनों हत्यारों को नरकभोग के बाद समान रूप से चांडाल योनि का दंड मिलता है।

ब्रह्महत्यागोहत्याकन्या हत्या
पौराणिक कथाएँ

इंद्र देव की गलतियाँ और उनका दंड क्या था?

इंद्र की प्रमुख गलतियाँ हैं — अहिल्या के साथ छल (जिससे गौतम ऋषि ने श्राप दिया), ब्राह्मण विश्वरूप का वध (ब्रह्महत्या का पाप), और गोवर्धन प्रसंग में अहंकार। इन्हीं कारणों से उनकी पूजा प्रचलित नहीं है।

इंद्र देवअहिल्याब्रह्महत्या
शिव महिमा

ब्रह्माजी का सिर काटने के बाद शिव को ब्रह्महत्या का पाप क्यों लगा?

ब्रह्मा के सिर की हत्या महापाप (ब्रह्महत्या) है इसलिए भैरव रूप में शिव को यह दोष लगा। भैरव कपाल हाथ में लेकर तीर्थाटन करते रहे। काशी पहुँचने पर कपाल गिरा और पाप-मुक्ति हुई — वह स्थान 'कपाल मोचन' कहलाया।

ब्रह्महत्याकाल भैरवकपाल मोचन

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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