विस्तृत उत्तर
ब्रह्महत्या का प्रायश्चित अघोर मंत्र जप से बताया गया है। पाठ में स्पष्ट कहा गया है कि एक लाख बार अघोर मंत्र जपकर ब्रह्महत्यारा भी मुक्त हो जाता है। आगे गुरुपत्नी में आसक्ति रखने वाले, मातृवध करने वाले और ब्रह्महत्यारे नराधम के लिए दस लाख मानस जप करने का भी विधान बताया गया है। महापातक करने वाले ब्राह्मण के लिए पंचगव्य-संबंधी विधि, अघोर मंत्र से अभिमंत्रण, हवन, शिवस्नान, उपवास और गायत्री जप भी पापमुक्ति हेतु बताया गया है।
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