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विस्तृत उत्तर
क्रोध में किए गए पाप अघोर मंत्र के आठ गुना जप से दूर बताए गए हैं। जप-विधान में ब्रह्महत्या के लिए एक लाख अघोर मंत्र जप कहा गया है। उसी क्रम में वाचिक और मानसिक पापों के लिए घटती हुई संख्या दी गई है, जबकि जानबूझकर किए पापों के लिए चार गुना और क्रोधपूर्वक किए गए पापों के लिए आठ गुना जप बताया गया है। इससे स्पष्ट है कि क्रोध से जुड़े पापों के लिए अधिक गंभीर जप-विधान रखा गया है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 15, PDF पृष्ठ 69, श्लोक 7
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