विस्तृत उत्तर
महापातक से मुक्ति अघोर मंत्र की साधना और विधिपूर्वक प्रायश्चित से बताई गई है। महादेव ने कहा कि ब्रह्महत्या आदि महापातक इस अघोर रूप से दूर होते हैं। आगे ब्रह्महत्या, सुरापान, स्वर्णचोरी और गुरुपत्नीगमन जैसे महापातकों के लिए कपिला गाय से जुड़े पंचगव्य द्रव्य, अघोर मंत्र से अभिमंत्रण, हवन, शिव को घी से स्नान, उपवास, पंचगव्य पान और ब्रह्मसम्बन्धी गायत्री जप का विधान कहा गया है। इस विधि से अनेक गंभीर पापों से शीघ्र मुक्ति बताई गई है।
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