विस्तृत उत्तर
ब्रह्मा के सिर को काटने के कारण भैरव पर ब्रह्महत्या का पाप लग गया और ब्रह्मा का कपाल उनके हाथ से चिपक गया। इस पाप से मुक्ति पाने के लिए वे तीनों लोकों में घूमते रहे और अंततः काशी पहुँचे, जहाँ उन्हें इस पाप से मुक्ति मिली।
तभी से वे काशी के कोतवाल या 'दंडपाणि' (हाथ में दंड धारण करने वाले) के रूप में स्थापित हुए, जो काशी में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति के कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं और उन्हें पापों से मुक्त करते हैं।





