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भैरव परिचय⏱ 2 मिनट पठन

भैरव की उत्पत्ति कैसे हुई?

संक्षिप्त उत्तर

शिव पुराण: ब्रह्मा-विष्णु विवाद में ब्रह्मा ने मिथ्या दावा किया — शिव के क्रोध से उनकी भृकुटियों के मध्य से कालभैरव प्रकट हुए और उन्होंने ब्रह्मा के अहंकार-युक्त पांचवें सिर का छेदन किया। भैरव का जन्म अहंकार-विनाश के लिए हुआ।

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विस्तृत उत्तर

शिव पुराण के अनुसार, एक समय भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु के बीच इस बात पर विवाद उत्पन्न हो गया कि उनमें से श्रेष्ठ कौन है। इस विवाद को शांत करने के लिए, भगवान शिव एक अनंत ज्योतिर्लिंग (प्रकाश के स्तंभ) के रूप में उनके मध्य प्रकट हुए। उन्होंने यह शर्त रखी कि जो भी इस स्तंभ के आदि या अंत को खोज लेगा, वही श्रेष्ठ माना जाएगा।

विष्णु ने स्तंभ के निचले छोर को खोजने का प्रयास किया और ब्रह्मा ने ऊपरी छोर को। दोनों ही असफल रहे, परंतु ब्रह्मा ने मिथ्या दावा किया कि उन्होंने शीर्ष को देख लिया है।

ब्रह्मा के इस अहंकार और असत्य से भगवान शिव अत्यंत क्रोधित हुए। उनके इसी क्रोध से, उनकी भृकुटियों के मध्य से, एक प्रचंड स्वरूप का प्राकट्य हुआ — कालभैरव। शिव ने उन्हें ब्रह्मा के उस पांचवें सिर को काटने का आदेश दिया जिसने मिथ्या भाषण किया था। भैरव ने तुरंत अपने तेज-तर्रार खड्ग से ब्रह्मा के अहंकार-युक्त पांचवें सिर का छेदन कर दिया।

यह घटना भैरव के मूल उद्देश्य को स्थापित करती है — अहंकार, मिथ्या और दंभ का विनाश। उनका जन्म ही अहंकार पर विजय पाने के लिए हुआ था।

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