विस्तृत उत्तर
शिव पुराण के रुद्र संहिता के सती खंड में यह घटना विस्तार से वर्णित है। जब शिव के गणों ने और नारदजी ने उन्हें दक्ष के यज्ञ में सती के आत्मदाह का समाचार सुनाया तो भोलेनाथ अत्यंत क्रोधित हो उठे — उनके क्रोध से दसों दिशाएँ कांप उठीं।
शिव ने क्रोध में अपनी जटा से एक बाल उखाड़कर पर्वत-शिखर पर फेंका। उस जटा से शिव के पहले उग्र अवतार वीरभद्र की उत्पत्ति हुई। साथ ही महाकाली की भी उत्पत्ति हुई। वीरभद्र का रूप अत्यंत विकराल था — आठ भुजाएँ, भयानक स्वरूप, शिव के समान ही वेश-भूषा।
शिव ने वीरभद्र को आज्ञा दी कि वह दक्ष के यज्ञ का विध्वंस करे और दक्ष सहित उन सभी को दंडित करे जिन्होंने सती और शिव का अपमान किया। वीरभद्र अपनी सेना के साथ यज्ञ-स्थल की ओर प्रस्थान कर गए। इस प्रकार शिव का क्रोध वीरभद्र के रूप में साकार हुआ।





