विस्तृत उत्तर
शिव-पार्वती विवाह की तिथि के विषय में पुराणों में स्पष्ट उल्लेख मिलता है।
तिथि — पुराणों और शैव परंपरा के अनुसार शिव-पार्वती का विवाह फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को हुआ था — यही तिथि 'महाशिवरात्रि' कहलाती है। इसीलिए महाशिवरात्रि मनाने का एक प्रमुख कारण शिव-पार्वती का विवाह-उत्सव है।
महाशिवरात्रि की दोहरी महत्ता — ईशान संहिता के अनुसार इस रात्रि में आदिदेव भगवान शिव करोड़ों सूर्यों के समान प्रभाव वाले ज्योतिर्लिंग रूप में भी प्रकट हुए थे। इस प्रकार फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की रात दोनों कारणों से महाशिवरात्रि कहलाती है।
विवाह का विवरण — पार्वती की तपस्या पूर्ण होने पर शिव ने सप्तर्षियों के माध्यम से हिमवान को विवाह का प्रस्ताव भेजा। ब्रह्मा, विष्णु, इंद्र सहित सभी देवता बारात में आए। भगवान शंकर और माता पार्वती का विवाह बड़ी धूमधाम से संपन्न हुआ और पार्वती कैलाश पर्वत पर शिव के साथ विराजमान हुईं।





