विस्तृत उत्तर
शक्तिपीठों की उत्पत्ति की पौराणिक कथा देवी पुराण, शिव पुराण और तंत्र चूड़ामणि में विस्तार से वर्णित है।
घटनाक्रम — दक्ष के यज्ञ में माँ सती ने आत्मदाह किया। शिव ने सती के शव को यज्ञ-कुंड से निकालकर कंधे पर उठाया और विरह में तांडव करते हुए पृथ्वी पर भटकने लगे। शिव के तांडव से सृष्टि में प्रलय का भय उत्पन्न हुआ।
विष्णु का हस्तक्षेप — देवताओं ने भगवान विष्णु से सृष्टि की रक्षा के लिए प्रार्थना की। विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माँ सती के शव को धीरे-धीरे खंडित किया। शव के 51 टुकड़े अलग-अलग स्थानों पर गिरे। जहाँ-जहाँ सती के अंग या आभूषण गिरे वहाँ शक्तिपीठ स्थापित हुई।
शक्तिपीठ का स्वरूप — प्रत्येक शक्तिपीठ में एक देवी (शक्ति) और एक भैरव (संरक्षक शिव-रूप) की पूजा होती है। 12 ज्योतिर्लिंगों की तरह ये 51 शक्तिपीठ भी अत्यंत पावन सिद्ध तीर्थ माने जाते हैं।





