विस्तृत उत्तर
अनंग' का संस्कृत में अर्थ है — 'अ+अंग' = बिना अंग (शरीर) के।
कारण — शिव के तृतीय नेत्र की अग्नि ने कामदेव के शरीर को भस्म कर दिया। जब शिव ने रति की प्रार्थना और पार्वती के निवेदन पर कामदेव को पुनर्जीवित किया तो उन्हें सशरीर जीवन नहीं मिला। वे बिना शरीर के — केवल भावना और प्रेम-शक्ति के रूप में — अस्तित्व में आए। इसीलिए उन्हें 'अनंग' कहा जाता है।
दार्शनिक अर्थ — 'अनंग' का यह नाम एक गहरा सत्य दर्शाता है — प्रेम कभी नष्ट नहीं होता। शरीर नष्ट हो सकता है परंतु प्रेम-शक्ति अमर रहती है। कामदेव अनंग रूप में मनुष्य के हृदय में प्रेम का संचार करते रहते हैं।
परवर्ती जन्म — पुराणों के अनुसार द्वापर युग में कामदेव ने भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न के रूप में पुनः शरीर धारण किया। इस प्रकार 'अनंग' की अवस्था एक मध्यवर्ती दशा थी — शरीर के बिना प्रेम-तत्व का अस्तित्व।





