शिव-सती-पार्वती कथाकामदेव को अनंग क्यों कहते हैंकामदेव के शरीर को शिव के तृतीय नेत्र ने भस्म किया। पुनर्जीवन मिला पर शरीर नहीं — केवल प्रेम-शक्ति के रूप में। इसीलिए वे 'अनंग' (बिना शरीर के) कहलाए। द्वापर में कृष्ण-पुत्र प्रद्युम्न के रूप में पुनः जन्म हुआ।#अनंग#कामदेव#शरीर रहित
शिव-सती-पार्वती कथाकामदेव की मृत्यु के बाद रति ने क्या कियाकामदेव के भस्म होने पर रति ने शिव से क्षमायाचना और कठोर तपस्या की। पार्वती के निवेदन से शिव ने वरदान दिया — फाल्गुन पूर्णिमा को कामदेव अनंग रूप में जीवित होंगे और द्वापर में कृष्ण-पुत्र प्रद्युम्न के रूप में जन्मेंगे।#रति विलाप
गुप्त रुद्राक्ष प्रयोग७ मुखी रुद्राक्ष किस ग्रह से संबंधित है और इसके लाभ क्या हैं?७ मुखी रुद्राक्ष शनि ग्रह से जुड़ा है, इसका मंत्र 'ॐ हुं नमः' है और यह दरिद्र को ऐश्वर्य प्रदान करता है।#7 मुखी#अनंग#शनि
रामचरितमानस — बालकाण्डकामदेव भस्म होने के बाद किस नाम से जाने गये?कामदेव 'अनंग' (बिना शरीर/अंग के) नाम से जाने गये। शिवजी ने कहा — 'होइहि नामु अनंगु। बिनु बपु ब्यापिहि सबहि' — बिना शरीर के ही सबके हृदय में काम-भावना जगाते रहेंगे।#बालकाण्ड#अनंग#कामदेव
रामचरितमानस — बालकाण्डरति को शिवजी ने क्या वरदान दिया?शिवजी ने वरदान दिया — (1) कामदेव का नाम 'अनंग' (बिना शरीर) होगा, (2) बिना शरीर के ही सबके हृदय में व्यापेगा, (3) श्रीकृष्ण अवतार में प्रद्युम्न रूप में जन्म लेगा — तब रति को पति वापस मिलेगा।#बालकाण्ड#रति वरदान#अनंग