विस्तृत उत्तर
७ मुखी रुद्राक्ष अनंग और सप्तमातृका का स्वरूप है। इसका संबद्ध ग्रह शनि है। इसका बीज मंत्र 'ॐ हुं नमः' है। इसके धारण करने से दरिद्र व्यक्ति को भी ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है और यह महाश्री प्रदान करने वाला है।
७ मुखी रुद्राक्ष किस ग्रह से संबंधित है और इसके लाभ क्या हैं को संदर्भ सहित समझें
७ मुखी रुद्राक्ष किस ग्रह से संबंधित है और इसके लाभ क्या हैं का सबसे सीधा सार यह है: ७ मुखी रुद्राक्ष शनि ग्रह से जुड़ा है, इसका मंत्र 'ॐ हुं नमः' है और यह दरिद्र को ऐश्वर्य प्रदान करता है।
गुप्त रुद्राक्ष प्रयोग जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
इसी विषय पर 5 संबंधित प्रश्न और 6 विस्तृत लेख भी उपलब्ध हैं। इसलिए इस उत्तर को शुरुआती निष्कर्ष मानें और नीचे दिए गए अगले पन्नों से पूरा संदर्भ जोड़ें।
उत्तर पढ़ते समय यह देखें कि उसमें नियम, अपवाद और व्यवहारिक संदर्भ साफ हैं या नहीं।
गुप्त रुद्राक्ष प्रयोग श्रेणी के दूसरे प्रश्न इस उत्तर की सीमा और उपयोग दोनों स्पष्ट करते हैं।
यदि विस्तृत विधि या पृष्ठभूमि चाहिए, तो नीचे दिए गए लेख पहले खोलें।
इसी विषय के 5 प्रश्न
विषय की गहराई समझने के लिए इन संबंधित प्रश्नों को भी पढ़ें
ऐश्वर्य और महाश्री की प्राप्ति के लिए कौन सा रुद्राक्ष धारण करना चाहिए?
दरिद्रता दूर कर ऐश्वर्य और महाश्री पाने के लिए ७ मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।
कामदेव को अनंग क्यों कहते हैं
कामदेव के शरीर को शिव के तृतीय नेत्र ने भस्म किया। पुनर्जीवन मिला पर शरीर नहीं — केवल प्रेम-शक्ति के रूप में। इसीलिए वे 'अनंग' (बिना शरीर के) कहलाए। द्वापर में कृष्ण-पुत्र प्रद्युम्न के रूप में पुनः जन्म हुआ।
कामदेव की मृत्यु के बाद रति ने क्या किया
कामदेव के भस्म होने पर रति ने शिव से क्षमायाचना और कठोर तपस्या की। पार्वती के निवेदन से शिव ने वरदान दिया — फाल्गुन पूर्णिमा को कामदेव अनंग रूप में जीवित होंगे और द्वापर में कृष्ण-पुत्र प्रद्युम्न के रूप में जन्मेंगे।
कामदेव भस्म होने के बाद किस नाम से जाने गये?
कामदेव 'अनंग' (बिना शरीर/अंग के) नाम से जाने गये। शिवजी ने कहा — 'होइहि नामु अनंगु। बिनु बपु ब्यापिहि सबहि' — बिना शरीर के ही सबके हृदय में काम-भावना जगाते रहेंगे।
रति को शिवजी ने क्या वरदान दिया?
शिवजी ने वरदान दिया — (1) कामदेव का नाम 'अनंग' (बिना शरीर) होगा, (2) बिना शरीर के ही सबके हृदय में व्यापेगा, (3) श्रीकृष्ण अवतार में प्रद्युम्न रूप में जन्म लेगा — तब रति को पति वापस मिलेगा।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी लिंक





